Last updated: April 2nd, 2026 at 10:31 am

कानपुर। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े मामले में डोनर आयुष और रिसीवर पारुल तोमर को उन्नत चिकित्सा सुविधा के लिए लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान भेजा गया है। दोनों मरीजों को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी यूनिट से रेफर किया गया।
उच्च इलाज के लिए किया गया रेफर
मेडिकल कॉलेज में ट्रांसप्लांट से जुड़ी पूर्ण स्वीकृति और विशेषज्ञ सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को लखनऊ स्थानांतरित किया गया। उनके साथ एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी भेजी गई, जिसमें एनेस्थीसिया, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और मेडिसिन विभाग के डॉक्टर शामिल हैं।
विशेष टीम रखेगी स्वास्थ्य पर नजर
यह मेडिकल टीम सफर के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात रही, ताकि डोनर और रिसीवर दोनों की हालत स्थिर बनी रहे।
लोहिया संस्थान में मिलेगी बेहतर सुविधा
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि लखनऊ स्थित लोहिया संस्थान में पोस्ट-ट्रांसप्लांट मरीजों की निगरानी और इलाज अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद शुरुआती एक सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें विशेषज्ञों की निरंतर जरूरत रहती है। एंबुलेंस में वेंटिलेटर सहित सभी आधुनिक चिकित्सा उपकरण मौजूद थे, ताकि रास्ते में किसी भी गंभीर स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
सेफ कॉरिडोर के जरिए भेजे गए मरीज
दोनों मरीजों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने के लिए विशेष ‘सेफ कॉरिडोर’ बनाया गया। एंबुलेंस को पुलिस सुरक्षा के साथ गंगा बैराज मार्ग से लखनऊ के लिए रवाना किया गया। आवश्यक दवाइयां और मेडिकल सपोर्ट भी साथ भेजा गया।
क्या है पूरा मामला
29 मार्च की रात मुजफ्फरनगर निवासी पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट एक निजी अस्पताल में किया गया था। ट्रांसप्लांट के कुछ घंटों बाद ही डोनर आयुष और पारुल की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति गंभीर होने पर 30 मार्च की रात दोनों को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अब उन्हें लखनऊ रेफर किया गया है।
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