Last updated: April 2nd, 2026 at 11:32 am

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की घोषणा और आचार संहिता लागू होते ही चुनाव आयोग ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। आयोग ने महज 15 दिनों के भीतर 483 प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर के आदेश जारी कर दिए। यह आंकड़ा काफी बड़ा माना जा रहा है, क्योंकि असम, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हुए चुनावों के दौरान आयोग ने केवल 23 अधिकारियों के तबादले किए थे।
तृणमूल कांग्रेस ने जताई आपत्ति
इन तबादलों को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों का ट्रांसफर करना प्रशासनिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। वहीं राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम को पश्चिम बंगाल पर नियंत्रण स्थापित करने की सोची-समझी रणनीति बताया। विरोध के तहत पार्टी सांसदों ने 16 मार्च को राज्यसभा से वॉकआउट भी किया।
2021 की हिंसा का हवाला
चुनाव आयोग ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए इंटेलिजेंस रिपोर्ट और अन्य इनपुट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की
इन तबादलों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि सभी फैसले जमीनी हालात को ध्यान में रखकर लिए गए हैं, ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी के साथ भेदभाव नहीं किया गया है। सुनवाई के बाद 31 मार्च को हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
भाजपा ने फैसले का किया समर्थन
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग के इस कदम का समर्थन किया है। पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि आयोग को अपने अधिकार क्षेत्र में निर्णय लेने का पूरा हक है और उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष चुनाव कराना होना चाहिए।
चरणबद्ध तरीके से हुए तबादले
चुनाव आयोग ने 15 मार्च से ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू की थी। सबसे पहले मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित 79 अधिकारियों को बदला गया।
इसके बाद:
17-18 मार्च को 38 IPS और 13 IAS अधिकारियों का ट्रांसफर
23 मार्च को 73 रिटर्निंग अधिकारियों को हटाया गया
29 मार्च को 83 बीडीओ और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों का तबादला
साथ ही 184 पुलिस इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में भेजा गया
इसके अलावा 13 वरिष्ठ IPS अधिकारियों को राज्य से बाहर भेजकर अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया है।
पुडुचेरी में नहीं हुआ कोई बदलाव
दिलचस्प बात यह है कि केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव आयोग ने किसी भी अधिकारी के तबादले का आदेश जारी नहीं किया है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि 2021 के चुनावों में केवल 15 अधिकारियों का तबादला किया गया था, जबकि इस बार इतनी बड़ी संख्या में बदलाव से प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
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