Last updated: April 3rd, 2026 at 10:55 am

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। चुनाव से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि वे बंगाल में करीब 15 दिनों तक रहेंगे, जिस पर टीएमसी ने तंज कसते हुए उन्हें राज्य के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने की सलाह दी है।
टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बंगाल मेहमानों का स्वागत खुले दिल से करता है और शाह जितने दिन चाहें रह सकते हैं। साथ ही पार्टी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे यहां के मशहूर पकवान जैसे मुड़ी घोंटो, पाबदा माछेर झाल, इलिश भापा, चिंगरी मलाई करी, भेटकी पतुरी और कोशा मंगशो जरूर ट्राई करें।
खान-पान को लेकर बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब टीएमसी नेताओं ने भाजपा पर मांसाहारी भोजन के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि यह कदम आम लोगों की खान-पान की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।
ममता बनर्जी का हमला
एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि मांस और मछली की खुले बाजार में बिक्री को लेकर प्रतिबंध की बात कही जा रही है, जो पूरी तरह जनविरोधी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ऐसा हुआ तो सड़कों पर दुकान लगाने वाले छोटे विक्रेताओं की आजीविका पर बड़ा असर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्य में मांस और मछली पर रोक लग सकती है, जिससे आम लोगों और छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा।
भाजपा का जवाब: खाने की आजादी बनी रहेगी
विवाद के बीच पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने साफ किया कि राज्य के लोगों को अपनी पसंद का खाना खाने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में मछली और मांस की उपलब्धता जारी रहेगी।
साथ ही उन्होंने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी केवल गोमांस की खुले में बिक्री का विरोध करती है, बाकी किसी भी खाद्य पर रोक लगाने की बात गलत है।
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