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बंगाल चुनाव 2026: ‘इस्तहार’ शब्द पर सियासी घमासान, भाषा बनी नया मुद्दा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच अब राजनीति केवल मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शब्दों के इस्तेमाल को लेकर
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच अब राजनीति केवल मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद गहराने लगा है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee द्वारा जारी ‘इस्तहार’ को लेकर भाजपा ने आपत्ति जताई है और इसे लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

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    भाजपा का कहना है कि ‘इस्तहार’ उर्दू मूल का शब्द है और इसका प्रयोग बंगाल की सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ है। पार्टी का मानना है कि इसकी जगह ‘घोषणापत्र’ शब्द का उपयोग होना चाहिए।

    भाषाविदों ने खारिज किया तर्क

    भाजपा के इस दावे को कई भाषा विशेषज्ञों ने सिरे से नकार दिया है। कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुनंदन सेन के अनुसार, ‘इस्तहार’ शब्द की जड़ें अरबी के ‘इश्तिहार’ से जुड़ी हैं, जो फारसी के जरिए बहुत पहले बांग्ला भाषा में शामिल हो चुका है।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे ‘जमीन’, ‘हवा’ और ‘लाल’ जैसे शब्द आज आम बोलचाल का हिस्सा हैं, उसी तरह ‘इस्तहार’ भी बांग्ला भाषा में पूरी तरह रच-बस चुका है।

    विशेषज्ञों ने बताया ‘राजनीतिक एजेंडा’

    इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट के पूर्व प्रोफेसर प्रबाल दासगुप्ता ने इस विवाद को ‘जल-पानी’ जैसी राजनीति करार दिया। उनका मानना है कि भाषा को धार्मिक नजरिए से देखना बंगाल की बहुसांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ है।

    रणनीति या ध्रुवीकरण?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक रणनीति हो सकती है। चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि क्या भाजपा इस मुद्दे के जरिए खुद को ‘सच्ची बंगाली संस्कृति’ का रक्षक दिखाना चाहती है या फिर यह मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश है।

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