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राज्यसभा में कारीगरों की आवाज गूंजी, राष्ट्रीय शिल्प बोर्ड बनाने की उठी मांग

पटना। संसद के उच्च सदन में पारंपरिक कारीगर समुदायों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया गया। शून्यकाल के दौरान
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पटना। संसद के उच्च सदन में पारंपरिक कारीगर समुदायों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया गया। शून्यकाल के दौरान भाजपा सांसद Bhim Singh ने बढ़ई, कुम्हार और लोहार जैसे वर्गों की स्थिति पर चिंता जताई।

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    उन्होंने कहा कि ये समुदाय लंबे समय से देश की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक ढांचे का अहम हिस्सा रहे हैं, लेकिन बदलते दौर में इन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    राष्ट्रीय शिल्पकला बोर्ड की मांग

    सांसद ने इन कारीगर वर्गों के संरक्षण और विकास के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के शिल्पकला बोर्ड के गठन की मांग की। उनका मानना है कि इस तरह का संस्थागत ढांचा इनकी परंपरागत कला और हुनर को नई पहचान देने में मदद करेगा।

    रोजगार और परंपरा दोनों पर असर

    उन्होंने बताया कि देश की लगभग 5 से 6 प्रतिशत आबादी इन पेशों से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक तकनीक और बदलते बाजार के कारण इनके पारंपरिक व्यवसाय कमजोर पड़ रहे हैं। इससे इनके रोजगार के अवसर भी लगातार घट रहे हैं।

    सरकारी मदद और बाजार की जरूरत

    डॉ. भीम सिंह ने सुझाव दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ इन समुदायों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। साथ ही उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और मार्केटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र, आसान ऋण और विशेष आर्थिक सहायता जैसे कदम उठाने पर भी जोर दिया, ताकि इन कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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