Last updated: April 9th, 2026 at 07:34 am

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
ताजा जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में हटाए गए मतदाताओं की संख्या अब 50 हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है। पहले करीब 47 हजार नाम सूची से हटाए गए थे, लेकिन बाद में लंबित मामलों की समीक्षा के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 50,600 से अधिक हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि जिन नामों को जांच के लिए लंबित रखा गया था, उनकी विस्तृत पड़ताल न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में की गई। इस प्रक्रिया में हजारों नामों को अयोग्य पाया गया, जिसके बाद उन्हें अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद शुरू हुई, जिसमें मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा गया था। इसके तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक स्तर पर जांच कराई गई।
सिर्फ भवानीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में इस अभियान का असर देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
इस बीच, चुनावी मुकाबले को लेकर भी दिलचस्प स्थिति बन गई है। इस सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने विपक्ष के प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी के मैदान में उतरने की चर्चा है, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो सकता है।
कुल मिलाकर, मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले चुनाव को और भी अहम बना दिया है।
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