Last updated: April 11th, 2026 at 02:36 pm

पटना: बेगूसराय के चर्चित रिंकू कुमारी संदिग्ध मौत मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। पटना हाई कोर्ट ने स्थानीय पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे पूरी तरह खारिज कर दिया है और अब इस केस की जांच वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव को सौंप दी है।
कोर्ट के इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर किसी एक अधिकारी को सीधे जांच की जिम्मेदारी सौंपना कम ही देखा जाता है। अदालत ने साफ कहा कि निष्पक्ष जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इस मामले में पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बेगूसराय जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से जुड़ा है, जहां करीब पांच साल पहले रिंकू कुमारी का शव संदिग्ध हालात में मिला था। परिवार ने इसे हत्या बताया, जबकि स्थानीय पुलिस ने इसे आत्महत्या मानते हुए केस को बंद करने की कोशिश की।
याचिकाकर्ता तेजस्विनी कुमारी ने अदालत में गुहार लगाई, जिसके बाद सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कोर्ट में यह भी बताया गया कि रिंकू कुमारी ने कुछ लोगों को जमीन के लिए करीब 15 लाख रुपये दिए थे, जो विवाद का कारण बन सकता है।
पुलिस जांच पर कोर्ट की सख्ती
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस संदीप कुमार ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जांच को जानबूझकर गलत दिशा में मोड़ा गया और सच्चाई सामने लाने की कोशिश नहीं की गई। इसी को देखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस केस की दोबारा जांच एक विशेष टीम द्वारा की जाए, जिसकी अगुवाई आईपीएस विकास वैभव करेंगे।
विकास वैभव ने क्या कहा?
जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद विकास वैभव ने कहा कि वे अदालत के भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जाएगी।
पीड़ित परिवार के लिए नई उम्मीद
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की नई उम्मीद मिली है। लंबे समय से इंसाफ के लिए संघर्ष कर रही तेजस्विनी कुमारी को अब भरोसा है कि सच्चाई सामने आएगी। वहीं, इस आदेश के बाद बेगूसराय पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है और पहले की गई जांच अब सवालों के घेरे में आ गई है।
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