Last updated: April 29th, 2026 at 03:55 pm

बिहार में नल-जल योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में यह सामने आया कि कई अधिकारी और इंजीनियर फील्ड विजिट से बच रहे हैं, जिससे योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है।
विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो इंजीनियर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह या निष्क्रिय पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) भी दी जा सकती है।
मुंगेर, लखीसराय और जमुई प्रमंडलों की समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ सहायक अभियंता मुख्यालय से बाहर ही नहीं निकले। इस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सभी अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं की निगरानी करने को कहा है।
साथ ही, कार्यपालक अभियंताओं को लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और काम में गति लाने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीकृत शिकायत निवारण केंद्र (CGRC) पर लंबित मामलों के जल्द निपटारे पर भी जोर दिया गया है।
विभाग ने साफ कर दिया है कि अब काम में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी पदाधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करना होगा।
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