Last updated: May 17th, 2026 at 01:07 pm

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेरोजगारी और महंगाई एक बार फिर बड़े मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार को इन विषयों पर घेर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और बढ़ती महंगाई से आम जनता परेशान है।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने हालिया कार्यक्रमों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदेश के लाखों युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। पार्टी का दावा है कि भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक और खाली पदों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीन पर युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा।
कांग्रेस नेताओं ने भी महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि खाने-पीने की चीजों, गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की जरूरतों के सामान की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बेरोजगारी और महंगाई ऐसे मुद्दे हैं जिनका सीधा असर जनता की जिंदगी पर पड़ता है। यही वजह है कि विपक्ष इन्हें चुनावी रणनीति के केंद्र में रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले चुनावों से पहले ये विषय राजनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बन सकते हैं।
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कई मौकों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय सरकार केवल प्रचार में व्यस्त है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेज नियुक्तियों की मांग भी उठाई।
वहीं योगी सरकार का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, औद्योगिक निवेश और स्टार्टअप योजनाओं के जरिए लाखों युवाओं को फायदा मिलेगा। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया जारी है और आने वाले समय में बड़ी संख्या में नियुक्तियां की जाएंगी। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath कई बार कह चुके हैं कि प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए निवेश और उद्योग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। युवाओं को वास्तविक नौकरियों की जरूरत है। कई छात्र संगठनों ने भी भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं।
महंगाई को लेकर भी आम लोगों के बीच चिंता देखी जा रही है। बाजार में सब्जियों, खाद्य तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। विपक्ष इन मुद्दों को जनता के बीच लगातार उठा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में रोजगार और महंगाई सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों में शामिल हैं। युवाओं की बड़ी आबादी होने के कारण रोजगार का सवाल हमेशा चुनावी बहस के केंद्र में रहता है।
सोशल media पर भी बेरोजगारी और महंगाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई युवा सरकार से नौकरी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं भाजपा समर्थक सरकार की विकास योजनाओं और निवेश परियोजनाओं को उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे चुनावी दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। विपक्ष बेरोजगारी और महंगाई को बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा विकास और निवेश के जरिए जनता का भरोसा बनाए रखने में जुटी हुई है।
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