Last updated: May 17th, 2026 at 01:25 pm
Uganda’s Foreign Minister Odongo Jeje Abubakha, Indonesia's Foreign Minister Sugiono, Iran's Foreign Minister Abbas Araqchi, South Africa's Foreign Minister Ronald Lamola, Russia's Foreign Minister Sergei Lavrov, India's Foreign Minister Subrahmanyam Jaishankar, Brazil's Foreign Minister Mauro Vieira, Egypt's Foreign Minister Badr Abdelatty, Ethiopia's Foreign Minister Gedion Timothewos, China's Ambassador to India Xu Feihong, UAE's Minister of State for Foreign Affairs Khalifa bin Shaheen Al Marar, and others pose for a family photo during the BRICS foreign ministers' meeting at Bharat Mandapam in New Delhi, India May 14, 2026. REUTERS/Adnan Abidiनई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत कूटनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई। इस महत्वपूर्ण बैठक में वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा, ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान बहुपक्षीय सहयोग और ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
BRICS दुनिया के तेजी से उभरते आर्थिक समूहों में शामिल है। इसमें Brazil, Russia, India, China और South Africa जैसे बड़े देश शामिल हैं। हाल के वर्षों में इस संगठन का प्रभाव लगातार बढ़ा है और कई नए देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में पश्चिमी देशों के प्रभाव के विकल्प के रूप में भी देखा जाने लगा है।
बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि आज दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं का असर विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। ऐसे में BRICS देशों के बीच मजबूत सहयोग बेहद जरूरी हो गया है।
भारत ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी जोर दिया। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई ताकि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के असर को कम किया जा सके। इसके अलावा डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे विषयों पर भी बातचीत हुई।
बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी चर्चा की गई। भारत ने कहा कि वैश्विक संघर्षों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है और शांति बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है। भारतीय प्रतिनिधियों ने संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। भारत खुद को विकासशील देशों की आवाज के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि भारत ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठा रहा है।
इस बैठक को भारत की विदेश नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार पिछले कुछ वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने पर लगातार जोर देती रही है। G20 के बाद अब BRICS मंच पर भी भारत सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है।
हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद भी मौजूद हैं। खासतौर पर चीन और अन्य देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा होती रहती है। इसके बावजूद सदस्य देश आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत में इस बैठक को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। सरकार समर्थकों का कहना है कि भारत आज वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है। वहीं विपक्ष का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में BRICS संगठन की भूमिका और बढ़ सकती है। दुनिया में बदलते शक्ति संतुलन के बीच यह समूह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और व्यापार में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
कुल मिलाकर नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक ने यह साफ संकेत दिया है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर केवल भागीदारी नहीं बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर इसका असर साफ दिखाई दे सकता है।
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