Last updated: May 18th, 2026 at 01:00 pm

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया बड़ी गिरावट के साथ 96 के पार पहुंच गया। इसके साथ ही शेयर बाजार में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों के बीच बेचैनी दिखाई दी और कई सेक्टर्स में दबाव बढ़ गया।
रुपये में आई इस गिरावट ने बाजार में नई चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट की स्थिति लगातार खराब होती दिख रही है और उसका असर अब तेल की कीमतों से लेकर शेयर बाजार तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 फीसदी तक उछाल देखने को मिला है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, खासकर कच्चा तेल। ऐसे में जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, उसका असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि रुपये पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सोमवार को बाजार खुलने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। कई निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की तरफ रुख करना शुरू कर दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर पड़ता है। अगर आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर महंगाई और रुपये दोनों पर पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर भी डॉलर और रुपये को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं। कुछ यूजर्स ने पुराने समय की तुलना करते हुए लिखा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की यह गिरावट आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ता है। यही कारण है कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता को लेकर लोग लगातार नजर बनाए हुए हैं।
इस बीच विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर भी सबकी नजर है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है तो कई बड़े निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। भारतीय बाजार पर भी इसी तरह का दबाव देखने को मिल रहा है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति जल्दी नियंत्रण में आ जाती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। लेकिन फिलहाल निवेशकों के बीच सावधानी का माहौल दिखाई दे रहा है।
रुपये की गिरावट के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी हलचल बढ़ गई है। जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो लोग सुरक्षित निवेश की तरफ जाते हैं और सोने की मांग बढ़ने लगती है। इसी वजह से बाजार में गोल्ड की कीमतों पर भी असर देखा जा रहा है।
मिडिल ईस्ट की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है क्योंकि वहां का हर बड़ा घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। भारत जैसे देशों पर इसका असर ज्यादा दिखाई देता है क्योंकि तेल आयात पर काफी निर्भरता है।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर रख रहे हैं और आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक मिडिल ईस्ट के हालात पर निर्भर करती दिखाई दे रही है।
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