Last updated: May 19th, 2026 at 05:05 am

पटना हाईकोर्ट ने सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा श्रेणी कम करने के मामले में बिहार सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें उनकी Y+ सुरक्षा घटाकर Y कैटेगरी कर दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता जरूरी है।
अदालत ने उठाए फैसले पर सवाल
पटना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार ने अपने फैसले में कहा कि सरकार या प्रशासन अपनी इच्छा से निर्णय नहीं ले सकता। अदालत ने माना कि सुरक्षा में कटौती से पहले खतरे का कोई ठोस मूल्यांकन नहीं किया गया और न ही सांसद का पक्ष लिया गया।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सुरक्षा कम करने की जानकारी संबंधित सांसद को औपचारिक रूप से तक नहीं दी गई थी, जो प्रक्रिया की गंभीर कमी को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट के बाद तेज हुई सुनवाई
जानकारी के मुताबिक सांसद पप्पू यादव ने सुरक्षा बढ़ाने और बहाल करने की मांग को लेकर पहले हाईकोर्ट का रुख किया था। बाद में मामला सुप्रिम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद पटना हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने बिहार सरकार के सितंबर 2025 के आदेश को रद्द करते हुए Y+ सुरक्षा फिर से लागू करने का निर्देश दिया।
सरकार को नया थ्रेट असेसमेंट करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के गृह विभाग को नया खतरा आकलन (थ्रेट असेसमेंट) करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में सांसद और सुरक्षा एजेंसियों दोनों की राय ली जाए और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।
फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
अदालत के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे प्रशासनिक मनमानी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी बता रहे हैं। पप्पू यादव की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Kanishk Arora ने फैसले को संविधान और कानूनी प्रक्रिया की जीत बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में सरकार को पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए।
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