Last updated: May 19th, 2026 at 05:21 am

बिहार की राजनीति में पूर्व सांसद आनंद मोहन के हालिया बयानों ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उनके आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर बयान देने से पहले उन्हें गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
JDU नेताओं ने किया पलटवार
जदयू नेताओं का कहना है कि आनंद मोहन पार्टी के आधिकारिक सदस्य नहीं हैं, इसलिए संगठन के अंदरूनी मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं है। पार्टी ने साफ किया कि नेतृत्व और टिकट से जुड़े फैसले संगठन के दायरे में लिए जाते हैं।
नीतीश कुमार के समर्थन में उतरे मंत्री
बिहार सरकार की मंत्री लेशी सिंह ने आनंद मोहन के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि जदयू की राजनीति सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान बिहार की जनता के बीच बेहद मजबूत है और उसे कोई कमजोर नहीं कर सकता।
दरअसल, आनंद मोहन ने हाल के दिनों में आरोप लगाया था कि पार्टी के भीतर कुछ लोग नीतीश कुमार की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने टिकट वितरण और मंत्री पद को लेकर भी सवाल उठाए थे।
पार्टी प्रवक्ताओं ने भी जताई नाराजगी
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार समेत अन्य नेताओं ने कहा कि संगठन से जुड़े फैसलों पर बाहरी लोगों की टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है। पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की छवि और योगदान को जनता अच्छी तरह जानती है।
परिवार का जदयू से जुड़ाव भी आया चर्चा में
जदयू नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि आनंद मोहन का परिवार पहले से ही पार्टी से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी लवली आनंद सांसद हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद जदयू विधायक के रूप में सक्रिय राजनीति में हैं।
टिकट बेचने के आरोप पर बढ़ा विवाद
इसी बीच बिहार सवर्ण आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह ने भी आनंद मोहन पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि टिकट बेचने की राजनीति का अनुभव आनंद मोहन को ही रहा है।
राजकुमार सिंह ने कहा कि जब बिहार पीपुल्स पार्टी सक्रिय थी, उस दौरान टिकट वितरण को लेकर कई विवाद सामने आए थे। उनके बयान के बाद बिहार की राजनीति में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है।
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