Last updated: May 31st, 2026 at 05:19 am

पटना: बिहार सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और विधानमंडल समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब विधानसभा और विधान परिषद की विभिन्न समितियों की बैठकों में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। इस संबंध में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
सरकार के अनुसार, कई बार समितियों की बैठकों में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने में देरी होती रही है। इसे देखते हुए अब अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को बैठकों में भाग लेने के लिए विशेष रूप से निर्देशित किया गया है।
यदि किसी विशेष परिस्थिति में विभागीय प्रमुख बैठक में शामिल नहीं हो पाते हैं, तो उन्हें पहले से इसकी सूचना देनी होगी। साथ ही अपने स्थान पर ऐसे अधिकारी को भेजना होगा, जिसे विभाग से जुड़े सभी विषयों और लंबित मामलों की पूरी जानकारी हो।
हाल के दिनों में समितियों की बैठकों के दौरान अधिकारियों की गैरहाजिरी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई थी। इसी के बाद सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
मुख्य सचिव ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे पर भी जोर दिया है। उन्होंने निर्देश दिया कि वर्षों से लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान हो सके।
लोक लेखा समिति (PAC) से संबंधित मामलों में भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। महालेखाकार की रिपोर्टों में दर्ज वित्तीय अनियमितताओं और लंबित आपत्तियों पर तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत संबंधित विभागों को समिति की बैठक से एक सप्ताह पहले अपनी कार्रवाई रिपोर्ट की 30 प्रतियां सचिवालय में जमा करनी होंगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और समितियों द्वारा दिए गए सुझावों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से शासन व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी।
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