Last updated: June 5th, 2026 at 03:54 pm

कोलकाता, 5 जून। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हाल के चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व को लेकर संगठन में दरारें और गहरी होती दिख रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कोलकाता स्थित ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई विधायकों और सांसदों की बैठक में अपेक्षा से काफी कम उपस्थिति दर्ज की गई। बैठक में केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही शामिल हुए, जबकि इससे पहले भी हुई बैठकों में उपस्थिति कम रहने की बात सामने आई थी।
पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि TMC के कई विधायक और सांसद पार्टी नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने अलग रुख अपनाते हुए विपक्षी नेतृत्व के साथ नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है, जिससे पार्टी संगठन में तनाव और बढ़ गया है।
बैठक में शामिल प्रमुख नेताओं में बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब जैसे नाम शामिल रहे। वहीं सांसदों में डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा स्तर पर भी पार्टी में बड़ी टूट की आशंका जताई जा रही है। 29 लोकसभा सांसदों में से लगभग 23 सांसदों के असंतुष्ट गुटों के संपर्क में होने की चर्चा है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
राज्यसभा में भी पार्टी के 13 सांसद हैं, लेकिन संगठन के भीतर असंतोष को लेकर चिंता बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह असंतोष बढ़ता है तो इसका असर संसद तक देखने को मिल सकता है।
TMC के भीतर यह संकट केवल राजनीतिक चुनौती नहीं बल्कि नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी के भीतर अब ममता बनर्जी और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी के प्रभाव को लेकर भी मतभेद सामने आने लगे हैं।
हालांकि पार्टी नेतृत्व का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी बड़े विभाजन की संभावना नहीं है, लेकिन लगातार सामने आ रही नाराजगी ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। ममता बनर्जी ने कुछ असंतुष्ट विधायकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क साधने की कोशिश भी शुरू कर दी है, ताकि संगठन में एकता बनी रहे।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में TMC की यह अंदरूनी खींचतान राज्य की राजनीति को गहरे रूप से प्रभावित कर सकती है।
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