Last updated: June 10th, 2026 at 05:58 am

बिहार सरकार ने राज्यभर में संचालित निजी कोचिंग संस्थानों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की पहल की है। सरकार का कहना है कि छात्रों के हितों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोचिंग संस्थानों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।
नए निर्देशों के तहत सभी निजी कोचिंग संस्थानों को अपने यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूरा विवरण संबंधित जिला प्रशासन के पास उपलब्ध कराना होगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज होगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
इसके अलावा सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्कूल और कॉलेज के निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोचिंग कक्षाओं का संचालन नहीं किया जाना चाहिए। इस कदम का उद्देश्य नियमित शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की उपस्थिति और पढ़ाई को प्राथमिकता देना है। हालांकि यह नियम उन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगा, जिन्होंने अपनी नियमित स्कूली या महाविद्यालयी शिक्षा पूरी कर ली है और केवल प्रतियोगी परीक्षाओं या अन्य पाठ्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग को इस संबंध में विस्तृत नियमावली तैयार करने का निर्देश दिया है। विभाग को कोचिंग संस्थानों के संचालन, पंजीकरण, निगरानी और नियमों के अनुपालन से जुड़े प्रावधानों पर काम करने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन, पारदर्शिता और बेहतर शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। नए नियम लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जानकारों का मानना है कि राज्य में तेजी से बढ़ रहे कोचिंग उद्योग को व्यवस्थित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ भविष्य में प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की जाने वाली नई नियमावली के बाद कोचिंग संस्थानों के लिए अनुपालन संबंधी स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जिससे छात्रों और अभिभावकों को भी अधिक पारदर्शी और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।
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