Last updated: June 10th, 2026 at 06:18 pm

भारत आगामी BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। सरकार और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंच भारत को वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं और अपेक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने का अवसर प्रदान करता है।
BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हाल के वर्षों में शामिल हुए नए सदस्य देश भी शामिल हैं। संगठन के विस्तार के बाद इसकी आर्थिक और राजनीतिक प्रभावशीलता में वृद्धि हुई है। ऐसे में आगामी सम्मेलन को वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत लंबे समय से विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने की वकालत करता रहा है। वैश्विक दक्षिण के देशों के सामने वित्तीय संसाधनों, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियां मौजूद हैं। भारत इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में प्रमुखता से शामिल करने का प्रयास कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सम्मेलन के दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत का मानना है कि वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
हाल के वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इसी कारण विभिन्न देशों की नजर भारत की भूमिका और उसकी कूटनीतिक पहल पर बनी हुई है। BRICS मंच पर भारत आर्थिक सहयोग और संतुलित वैश्विक विकास के पक्ष में लगातार अपनी बात रखता रहा है।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार BRICS केवल आर्थिक मंच नहीं बल्कि रणनीतिक संवाद का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच सदस्य देश व्यापार और विकास के नए अवसर तलाशने का प्रयास कर रहे हैं।
भारत का लक्ष्य सम्मेलन के माध्यम से विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना भी है। सरकार का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से ही संभव है।
फिलहाल BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां जारी हैं और भारत की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विशेष नजर बनी हुई है। सम्मेलन के दौरान लिए जाने वाले निर्णय आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
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