Last updated: June 12th, 2026 at 05:26 pm

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार की आर्थिक हालत चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुकी है।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि राज्य में राजस्व में गिरावट, बढ़ते कर्ज और वित्तीय घाटे के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत नीतियों और कमजोर वित्तीय प्रबंधन के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कई नियमित सरकारी भुगतानों के लिए आकस्मिक निधि (Contingency Fund) का उपयोग किया जा रहा है, जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं होना चाहिए। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जब पेंशन और अन्य नियमित भुगतान भी इस निधि से किए जा रहे हैं, तो यह गंभीर वित्तीय असंतुलन को दर्शाता है।
अपने बयान में उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि आकस्मिक निधि का उपयोग केवल आपातकालीन परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, न कि नियमित खर्चों के लिए। उन्होंने सरकार से इस विषय पर स्पष्टता देने की मांग की।
तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि बिहार का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा से अधिक हो चुका है, जिससे वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजटीय प्रबंधन में गड़बड़ी के कारण विकास कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि वह वास्तविक स्थिति को स्वीकार करने के बजाय भ्रामक जानकारी के जरिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
विपक्ष के इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से पहले भी वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठाए गए सवालों को नकारा गया है और इसे नियमित बजटीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष लगातार इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटा हुआ है।
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