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यूरोसैटरी 2026 में भारत की मजबूत मौजूदगी, स्वदेशी रक्षा तकनीक ने खींचा दुनिया का ध्यान

फ्रांस की राजधानी पेरिस के निकट आयोजित यूरोसैटरी 2026 प्रदर्शनी में भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए वैश्विक
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फ्रांस की राजधानी पेरिस के निकट आयोजित यूरोसैटरी 2026 प्रदर्शनी में भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए वैश्विक रक्षा उद्योग का ध्यान आकर्षित किया है। यूरोसैटरी को दुनिया की सबसे बड़ी भूमि और सुरक्षा रक्षा प्रदर्शनी माना जाता है, जहां 61 देशों की 2,000 से अधिक कंपनियां और संगठन भाग ले रहे हैं। इस मंच पर भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीकों, उन्नत सैन्य प्रणालियों और रक्षा निर्माण क्षमता का व्यापक प्रदर्शन किया है।

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    भारत की ओर से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), टोंबो इमेजिंग, Kalyani Strategic Systems Limited (KSSL), MKU और अन्य प्रमुख रक्षा कंपनियों ने भागीदारी की है। इन संस्थाओं ने विभिन्न आधुनिक रक्षा उपकरणों और तकनीकों को प्रदर्शित किया, जिससे भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति को वैश्विक पहचान मिली।

    प्रदर्शनी में भारत के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक KSSL द्वारा विकसित नई MArG-39 आर्टिलरी गन प्रणाली रही। यह 155 मिमी की आधुनिक तोप प्रणाली है, जिसे उच्च गतिशीलता और “शूट एंड स्कूट” क्षमता के साथ विकसित किया गया है। यह प्रणाली दुर्गम क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से संचालन करने में सक्षम है और आधुनिक युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

    DRDO ने भी अपने कई अत्याधुनिक रक्षा उत्पादों और तकनीकों को प्रदर्शित किया। संगठन ने कहा कि यूरोसैटरी 2026 में भारत की भागीदारी देश की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और नवाचार को प्रदर्शित करने का अवसर है। भारत सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने की नीति पर काम कर रही है। इस प्रदर्शनी में दिखाई गई तकनीकें उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाई है। यूरोसैटरी जैसे मंच भारत के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाने और संभावित ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

    भारत की भागीदारी ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर रक्षा और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। विभिन्न देशों द्वारा अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे माहौल में स्वदेशी तकनीकों और प्रतिस्पर्धी रक्षा उत्पादों के साथ भारत की उपस्थिति उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करती है।

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोसैटरी 2026 में भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि देश केवल रक्षा उपकरणों का उपभोक्ता नहीं बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण भागीदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित कर रही हैं और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता हासिल कर चुकी हैं।

    भारत और फ्रांस के बीच हाल ही में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर भी सहमति बनी है। दोनों देशों ने उन्नत रक्षा तकनीकों के सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय रक्षा उद्योग को और अधिक अवसर मिल सकते हैं तथा भविष्य में नई तकनीकों के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

    यूरोसैटरी 2026 में भारत की मजबूत उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। स्वदेशी तकनीकों, आधुनिक सैन्य प्रणालियों और बढ़ते रक्षा निर्यात के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में अपनी पहचान को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है।

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