Last updated: June 15th, 2026 at 05:49 pm

मध्य पूर्व में जारी तनाव और संघर्षों के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और सक्रिय कूटनीति का परिचय देते हुए शांति तथा स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया है। BRICS देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान भारत ने क्षेत्रीय तनाव कम करने, संवाद को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की वकालत की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों को सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे।
हाल के महीनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विभिन्न देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों के कारण क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हुई है। इस स्थिति का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापार मार्गों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत ने संवाद और कूटनीतिक समाधान को सबसे प्रभावी रास्ता बताया है।
BRICS मंच पर अपने संबोधन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि किसी भी क्षेत्रीय संकट का समाधान केवल सैन्य उपायों से संभव नहीं है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की। भारत का मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी संबंधित पक्ष संवाद और आपसी सम्मान के आधार पर आगे बढ़ें।
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे को भी विशेष महत्व दिया। मध्य पूर्व भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है। क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर अधिक पड़ता है। इसी कारण भारत लगातार क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
BRICS समूह, जिसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा हाल में शामिल अन्य सदस्य देश शामिल हैं, वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। भारत ने बैठक में यह भी कहा कि बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाना वर्तमान समय की आवश्यकता है। वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह पहल उसकी संतुलित कूटनीतिक नीति को दर्शाती है। भारत एक ओर विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक मंचों पर शांति और संवाद का समर्थन करता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
मध्य पूर्व में लाखों भारतीय नागरिक कार्यरत हैं और क्षेत्र के देशों के साथ भारत के गहरे आर्थिक तथा व्यापारिक संबंध हैं। इसलिए वहां की स्थिरता भारत के राष्ट्रीय हितों से भी जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनी रहने से व्यापार, निवेश और ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
भारत ने BRICS मंच पर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार का आतंकवाद और हिंसा वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती है। इसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के सम्मान की भी आवश्यकता बताई।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत की विदेश नीति का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देना है। मध्य पूर्व संकट पर भारत का रुख इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है। देश लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि संवाद, सहयोग और कूटनीति ही दीर्घकालिक समाधान का आधार बन सकते हैं।
फिलहाल मध्य पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में BRICS मंच पर भारत द्वारा शांति, स्थिरता और सहयोग की पैरवी को महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय प्रयास यह तय करेंगे कि संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति और संवाद के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।
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