Last updated: June 24th, 2026 at 01:58 pm

दिल्ली की राजनीति और प्रशासन में यमुना नदी की सफाई और पुनर्जीवन का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यमुना पुनर्जीवन परियोजना को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में नदी की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और दीर्घकालिक विकास योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
यमुना नदी दिल्ली की जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन वर्षों से प्रदूषण और अव्यवस्थित शहरी विकास के कारण इसकी स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नदी को स्वच्छ और पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। समीक्षा बैठक में इन योजनाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर विचार किया गया।
अमित शाह ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि यमुना की सफाई से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरणीय परियोजना नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा विषय है। गृह मंत्री ने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बैठक में राजधानी में चल रहे सफाई अभियानों और सीवेज प्रबंधन परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि विभिन्न नालों के उपचार, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के आधुनिकीकरण और प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में नदी में गिरने वाले प्रदूषित जल को रोकने, सीवेज नेटवर्क को मजबूत करने और हरित क्षेत्रों के विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि यमुना से जुड़े कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम जारी है और उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा नदी के किनारे पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी विचार किया गया।
राजनीतिक दृष्टि से भी यमुना सफाई का मुद्दा दिल्ली में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। विभिन्न चुनावों में राजनीतिक दलों ने इसे प्रमुख चुनावी वादा बनाया है। भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सभी समय-समय पर इस विषय को लेकर अपनी-अपनी योजनाएं और दावे प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में इस समीक्षा बैठक को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना नदी को स्वच्छ बनाना एक दीर्घकालिक और जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करना, आधुनिक सीवेज प्रणाली विकसित करना और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उनका मानना है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय इस परियोजना की सफलता की कुंजी होगा।
पर्यावरणविदों के अनुसार यमुना की स्थिति में सुधार होने से न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा बल्कि दिल्ली की जल सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नदी के पुनर्जीवन से जैव विविधता संरक्षण और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल अमित शाह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक ने यमुना पुनर्जीवन परियोजना को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों इस परियोजना को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि योजनाओं का क्रियान्वयन किस गति से आगे बढ़ता है और यमुना की स्थिति में कितना सुधार दिखाई देता है।
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