Last updated: June 15th, 2026 at 11:14 am

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक प्रतिनिधित्व दाखिल किया गया है, जिसमें इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
यह आवेदन एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित किया गया है। इसमें मांग की गई है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट स्वयं करे।
प्रस्तुतीकरण में कहा गया है कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक निगरानी आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह के दुरुपयोग या अनियमितताओं की संभावना को खत्म किया जा सके।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने के बावजूद अब तक औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। इसमें कहा गया है कि बिना आपराधिक प्रक्रिया शुरू किए जांच को केवल प्रशासनिक स्तर पर सीमित रखना उचित नहीं है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि इस तरह के मामलों में तुरंत और पारदर्शी जांच नहीं होती, तो जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है, विशेषकर जब मामला करोड़ों श्रद्धालुओं के दान से जुड़ा हो।
प्रस्तुतीकरण में यह भी कहा गया है कि जांच का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, स्वतंत्र और दबाव-मुक्त हो।
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है, जब समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े दान में करोड़ों रुपये के गबन की आशंका है और इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है और अदालत से इस पर आगे निर्देशों की प्रतीक्षा की जा रही है।
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