Last updated: December 18th, 2025 at 04:56 pm

यूपी में आजम खां को बड़ी अदालत से राहत:
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आजम खां का नाम चर्चा में है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खां को भड़काऊ भाषण के एक पुराने मामले में अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में बहस तेज हो गई है और अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
आजम खां पर आरोप था कि उन्होंने एक चुनावी सभा के दौरान ऐसा भाषण दिया था, जिसे भड़काऊ बताया गया। इस मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था और लंबे समय से यह मामला अदालत में चल रहा था। अभियोजन पक्ष का कहना था कि भाषण से समाज में तनाव फैल सकता था, जबकि बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक बयान बताया और कहा कि इसमें कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।
अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया कि आजम खां के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो पाए। कोर्ट ने कहा कि केवल आरोप लगना ही किसी को दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं होता। पर्याप्त और ठोस सबूतों के अभाव में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इस फैसले को आजम खां और उनके समर्थकों ने न्याय की जीत बताया है।
अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि सच्चाई अंत में सामने आती है। उनका कहना है कि आजम खां को राजनीतिक वजहों से फंसाया गया था। वहीं, विपक्षी दलों ने इस पर सतर्क प्रतिक्रिया दी और कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
फैसले के बाद आजम खां के समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया। रामपुर और आसपास के इलाकों में समर्थकों ने एक-दूसरे को बधाइयां दीं। उनके लिए यह राहत इसलिए भी अहम है क्योंकि आजम खां पहले से कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। इस फैसले से उनकी राजनीतिक स्थिति को कुछ मजबूती मिलती नजर आ रही है।
इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में चुनावी माहौल में यह मुद्दा चर्चा में रह सकता है। समाजवादी पार्टी इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। वहीं, अन्य दल भी इस पर अपनी रणनीति तय कर सकते हैं।
हालांकि अदालत से राहत मिलने के बावजूद आजम खां के सामने कानूनी चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। उनके खिलाफ अन्य मामलों की सुनवाई अभी चल रही है। फिर भी इस फैसले को उनके लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि कानून की प्रक्रिया समय लेती है, लेकिन फैसला सबूतों के आधार पर ही होता है।
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