Last updated: April 11th, 2026 at 08:57 am

बिहार के बेगूसराय में पांच साल पहले हुई रिंकू कुमारी की संदिग्ध मौत के मामले में पटना हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस केस की दोबारा जांच कराने का आदेश देते हुए इसे बिहार के चर्चित आईपीएस अधिकारी IG विकास वैभव को सौंप दिया है।
जस्टिस संदीप कुमार की बेंच ने स्थानीय पुलिस द्वारा की गई जांच पर गंभीर सवाल उठाए और उनकी क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि निष्पक्ष जांच किसी भी व्यक्ति के निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार का अहम हिस्सा है, और इस मामले में यह सिद्धांत लागू नहीं हुआ।
अदालत के आदेश के अनुसार अब इस केस की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई जाएगी, जिसकी अगुवाई IG विकास वैभव करेंगे। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि पहले जांच करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ सकती है।
मामला कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से जुड़ा है, जहां रिंकू कुमारी की लाश संदिग्ध हालात में मिली थी। उस समय पुलिस ने इसे आत्महत्या बताते हुए केस बंद करने की कोशिश की थी, लेकिन परिजनों ने लगातार हत्या की आशंका जताई।
कोर्ट में पेश तथ्यों के अनुसार, मृतका के शरीर की स्थिति आत्महत्या की कहानी से मेल नहीं खाती थी। शव पर मिट्टी और धूल लगी हुई थी और गले में फंदा इस तरह था, जो संघर्ष की ओर इशारा करता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से एक अहम जानकारी भी सामने आई। बताया गया कि रिंकू कुमारी ने दो लोगों को जमीन खरीदने के लिए करीब 15 लाख रुपये एडवांस दिए थे। आरोप है कि न तो जमीन दी गई और न ही पैसे लौटाए गए। जब रिंकू ने पैसे वापस मांगे तो विवाद बढ़ गया और पंचायत भी हुई।
जानकारी के मुताबिक, आरोपियों ने 4 अप्रैल 2021 को पैसे लौटाने का वादा किया था। उसी दिन रिंकू कुमारी स्कूल के लिए निकलीं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी संदिग्ध हालत में मौत की खबर सामने आई। अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद परिजनों को न्याय की उम्मीद जगी है। नई जांच से मामले के कई छिपे पहलुओं के सामने आने की संभावना है।
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