Last updated: May 4th, 2026 at 08:44 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बीच राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती रुझानों में जहां भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाए हुए है, वहीं मुस्लिम बहुल सीटों पर भी पार्टी का प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है।
दोपहर तक मिले आंकड़ों के अनुसार भाजपा करीब 185 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 के आसपास सिमटी नजर आ रही है। ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि जिन सीटों को अब तक टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां इस बार क्या बदला?
मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक वाली सीटें हमेशा से चुनावी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाती रही हैं। लेकिन इस बार इन इलाकों में मतदाताओं के रुझान में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
मुर्शिदाबाद जिले की बात करें तो यहां भाजपा उम्मीदवार गौरी शंकर घोष बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि टीएमसी प्रत्याशी पीछे चल रहे हैं। इसी तरह हबीबपुर और मानबाजार जैसी सीटों पर भी भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, जो पहले टीएमसी के प्रभाव वाले क्षेत्र माने जाते थे।
इस बदले हुए समीकरण पर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि दक्षिण बंगाल में मुस्लिम वोटों का विभाजन हुआ है, जिससे भाजपा को सीधा लाभ मिला है। उनके अनुसार, पहले जहां इन इलाकों में एकतरफा वोटिंग देखने को मिलती थी, अब उसमें बदलाव आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का भी इस बदलाव में बड़ा योगदान हो सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान कई नाम सूची से हटाए गए, जिसका असर खासकर मुस्लिम बहुल जिलों में देखने को मिला है।
फिलहाल रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि बंगाल की राजनीति में पारंपरिक वोट बैंक की धारणा बदल रही है और इसका असर चुनावी नतीजों पर साफ दिखाई दे रहा है।
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