Last updated: January 25th, 2026 at 05:44 pm

कांग्रेस पार्टी ने बिहार में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। पार्टी ने राज्य के अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों में काम देखने के लिए 29 ऑब्जर्वर यानी पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इसका मकसद है कि बिहार में पार्टी संगठन को मजबूत किया जाए और आने वाले चुनावों व गठबंधन से जुड़े फैसलों को सही दिशा दी जा सके।
ऑब्जर्वर वे लोग होते हैं जिन्हें पार्टी ऊपर से किसी खास जिम्मेदारी के साथ भेजती है। उनका काम होता है जमीन पर जाकर हालात को समझना, कार्यकर्ताओं से मिलना, स्थानीय नेताओं से बात करना और पार्टी को सही रिपोर्ट देना। कांग्रेस चाहती है कि बिहार में जो भी समस्याएं हैं, संगठन में जो भी कमजोरी है, उसे सही तरीके से जाना जाए और समय रहते सुधार किया जाए।
इन 29 ऑब्जर्वरों की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने-अपने इलाके में जाकर देखें कि पार्टी कार्यकर्ता कितने सक्रिय हैं, जनता में कांग्रेस की छवि कैसी है और किस तरह की रणनीति अपनाने की जरूरत है। वे यह भी बताएंगे कि किन जगहों पर पार्टी को ज्यादा मेहनत करनी चाहिए और कहां संगठन मजबूत है।
कांग्रेस ने यह कदम इसलिए भी उठाया है क्योंकि बिहार की राजनीति में गठबंधन का बहुत बड़ा रोल रहता है। यहां कांग्रेस, राजद और दूसरे दलों के साथ मिलकर राजनीति करती रही है। ऐसे में पार्टी चाहती है कि वह अपने फैसले पूरी जानकारी के साथ ले। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि पार्टी कहां मजबूत है और कहां उसे सहयोगी दलों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा।
पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बिहार में ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि अगर संगठन को मजबूत नहीं किया गया तो आगे भी मुश्किलें आ सकती हैं। इसी वजह से ऑब्जर्वर भेजकर पार्टी यह जानना चाहती है कि जमीनी स्तर पर क्या दिक्कतें हैं। कहीं कार्यकर्ताओं में आपसी मतभेद तो नहीं, कहीं स्थानीय नेता जनता से दूर तो नहीं हो गए – इन सब बातों की जांच की जाएगी।
ऑब्जर्वर जिलों में बैठकें करेंगे, कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उन्हें पार्टी से जोड़ने का काम करेंगे। वे यह भी देखेंगे कि युवाओं और महिलाओं को पार्टी से कैसे जोड़ा जा सकता है। इससे कांग्रेस को नई ऊर्जा मिल सकती है और संगठन में नई जान आ सकती है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस का यह फैसला बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 29 ऑब्जर्वरों की नियुक्ति से पार्टी को जमीनी हकीकत समझने में मदद मिलेगी। इससे आने वाले समय में कांग्रेस अपने फैसले ज्यादा सोच-समझकर ले पाएगी और बिहार में अपनी स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश करेगी।
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