Last updated: December 15th, 2025 at 04:19 pm

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देने वाली कई योजनाओं की घोषणा की थी। इन योजनाओं का सीधा फायदा गरीब, मध्यम वर्ग, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा वर्ग को मिलेगा। सरकार का मकसद लोगों को आर्थिक सहारा देना और जीवन को थोड़ा आसान बनाना है। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम का इंतजाम सरकार कैसे करेगी।
सरकार की सबसे चर्चित योजना 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की है। इससे लाखों घरेलू उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिलेगा और हर महीने बिजली बिल का बोझ कम होगा। खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह योजना बड़ी राहत मानी जा रही है। हालांकि इससे बिजली विभाग पर खर्च का दबाव बढ़ेगा और सरकार को इसकी भरपाई करनी होगी।
इसके अलावा जीविका दीदियों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा भी की गई है। आगे चलकर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 2-2 लाख रुपये तक की सहायता देने की योजना है। इससे महिलाओं को अपना काम शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। महिला सशक्तिकरण के लिहाज से यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।
सरकार बुजुर्गों की पेंशन राशि बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दे रही है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति, स्कूलों में सुविधाएं और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर भी बड़ा खर्च किया जाएगा। स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है।
इतनी सारी योजनाओं के कारण सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ना तय है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पैसा कहां से आएगा। सरकार टैक्स और राजस्व संग्रह बढ़ाने पर जोर दे सकती है। शराबबंदी के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए अन्य स्रोतों से आय बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। जमीन की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और सरकारी सेवाओं की फीस में बदलाव भी एक रास्ता हो सकता है।
इसके अलावा केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता और योजनाओं का बेहतर उपयोग भी सरकार की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं से मिलने वाली राशि का सही तरीके से इस्तेमाल कर राज्य अपने खर्च का बोझ कुछ हद तक कम कर सकता है। साथ ही सरकारी खर्चों में कटौती और गैर जरूरी योजनाओं पर नियंत्रण भी जरूरी होगा।
कुल मिलाकर नीतीश सरकार ने चुनाव से पहले जनता को राहत देने का बड़ा दांव चला है। ये योजनाएं अगर सही तरीके से लागू होती हैं तो आम लोगों को फायदा जरूर मिलेगा। लेकिन सरकार के लिए असली परीक्षा यही होगी कि वह बिना जनता पर अतिरिक्त बोझ डाले इन योजनाओं के लिए जरूरी धन का इंतजाम कैसे करती है। आने वाले समय में सरकार की आर्थिक रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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