Last updated: September 3rd, 2026 at 07:51 am

बेंगलुरु: बिहार की कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और विरासत का रंग अब कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में नजर आएगा। बिहार महोत्सव 2026 का आयोजन 3 से 6 सितंबर तक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को बेंगलुरु पहुंचकर आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में इस चार दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।
चार दिनों तक दिखेगी बिहार की सांस्कृतिक पहचान
बिहार महोत्सव का उद्देश्य राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है। आयोजन में बिहार की लोक कला, पारंपरिक संगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर में होने वाला यह आयोजन बिहार की संस्कृति को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। खासतौर पर यहां रहने वाले प्रवासी बिहारियों के लिए यह अपनी जड़ों और पारंपरिक विरासत से जुड़ने का अवसर होगा।
प्रवासी बिहारियों के लिए खास आयोजन
बेंगलुरु में बड़ी संख्या में बिहार के लोग नौकरी, कारोबार और शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों में रह रहे हैं। ऐसे में चार दिवसीय महोत्सव उनके लिए अपनी मातृभूमि की संस्कृति को करीब से महसूस करने का मौका लेकर आया है।
आयोजन के जरिए नई पीढ़ी को भी बिहार की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराने पर जोर रहेगा। बदलते समय में पारंपरिक कला और लोक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिहाज से भी ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
लोक कला से लेकर पारंपरिक शिल्प तक दिखेंगे कई रंग
बिहार की सांस्कृतिक पहचान किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में लोकगीत, लोकनृत्य, चित्रकला, हस्तशिल्प और विभिन्न भाषाई-सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं।
बिहार महोत्सव में इन्हीं विविध रंगों को एक मंच पर सामने लाने की कोशिश की जाएगी। मिथिला की कला और बिहार की अन्य पारंपरिक विधाओं से लेकर लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां महोत्सव को खास बनाएंगी।
CM सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बेंगलुरु दौरे को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वह आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में बिहार महोत्सव 2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर बिहार की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने और राज्य की पहचान को व्यापक मंच देने पर जोर रहेगा।
बिहार की विरासत को राष्ट्रीय मंच देने की कोशिश
नालंदा और बोधगया की ऐतिहासिक विरासत से लेकर मिथिला की कला, लोकगीत और पारंपरिक शिल्प तक बिहार की सांस्कृतिक पहचान काफी व्यापक है। बेंगलुरु में आयोजित यह महोत्सव इसी विविध विरासत को दूसरे राज्यों के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास है।
3 से 6 सितंबर तक चलने वाला बिहार महोत्सव प्रवासी बिहारियों के लिए भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बनने के साथ-साथ दूसरे राज्यों के लोगों को बिहार की संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का अवसर भी देगा।
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