Last updated: January 8th, 2026 at 07:07 pm

बिहार में पिछले पाँच वर्षों के दौरान विकास कार्यों पर बड़े स्तर पर खर्च किया गया है। राज्य के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास को आगे बढ़ाने के लिए कुल लगभग 3,633 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह राशि अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर लगाई गई है। इन विकास योजनाओं का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के जीवन को आसान बनाना, सुविधाएँ बढ़ाना और राज्य को आगे की ओर ले जाना है।
इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा से जुड़े कामों में लगाया गया है। कई इलाकों में पुराने और जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराई गई है। जहाँ स्कूल नहीं थे, वहाँ नए स्कूल भवन बनाए गए हैं ताकि बच्चों को दूर न जाना पड़े और वे अपने गाँव या पास के क्षेत्र में ही पढ़ाई कर सकें। कक्षा के कमरे, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, बेंच-डेस्क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है। इससे स्कूलों का माहौल बेहतर हुआ है और बच्चों की उपस्थिति बढ़ने में मदद मिली है।
शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी ढांचे पर भी काफी काम किया गया है। सड़कों का निर्माण और मरम्मत, पुल-पुलियों का काम, नालियों की सफाई और सामुदायिक भवनों का निर्माण इस खर्च का अहम हिस्सा रहा है। अच्छी सड़कें बनने से लोगों का सफर आसान हुआ है, किसानों को अपनी फसल बाजार तक ले जाने में सहूलियत मिली है और छोटे व्यापारियों का काम भी बेहतर हुआ है। गाँवों और कस्बों को जोड़ने वाली सड़कों से विकास की रफ्तार तेज हुई है।
स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं को सुधारने के लिए भी इस फंड का इस्तेमाल किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत, नए भवनों का निर्माण, जरूरी उपकरणों की व्यवस्था और साफ-सफाई पर खर्च किया गया है। कई जगहों पर एंबुलेंस की सुविधा को बेहतर किया गया है ताकि जरूरत के समय मरीजों को जल्दी अस्पताल पहुंचाया जा सके। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को फायदा हुआ है।
विधायकों द्वारा किए गए इस खर्च का असर स्थानीय स्तर पर साफ दिखाई देता है। जिन इलाकों में लंबे समय से विकास के काम रुके हुए थे, वहाँ अब धीरे-धीरे बदलाव नजर आने लगा है। स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है, स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों का भरोसा बढ़ा है और बुनियादी सुविधाओं के कारण रोजमर्रा की परेशानियाँ कुछ हद तक कम हुई हैं। इससे लोगों में यह विश्वास पैदा हुआ है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीन पर भी दिख सकता है।
हालाँकि, कई लोग यह भी कहते हैं कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कुछ क्षेत्रों में काम की गति धीमी रही है और कहीं-कहीं गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठे हैं। इसके बावजूद यह माना जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि का विकास कार्यों में इस्तेमाल होना अपने आप में एक अहम कदम है। अगर योजनाओं को सही ढंग से लागू किया जाए और उनकी नियमित निगरानी हो, तो आने वाले समय में इसका और बेहतर असर देखने को मिल सकता है।
इस पूरे खर्च का मकसद सिर्फ इमारतें बनाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को सुधारना है। शिक्षा बेहतर होगी तो आने वाली पीढ़ी मजबूत बनेगी। स्वास्थ्य सुविधाएँ अच्छी होंगी तो लोग ज्यादा स्वस्थ रहेंगे। सड़क और अन्य ढांचा मजबूत होगा तो रोजगार और व्यापार के नए मौके पैदा होंगे। इस तरह विकास का सीधा फायदा आम आदमी तक पहुंचेगा।
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