Last updated: June 9th, 2026 at 06:54 am

बिहार में विधान परिषद (एमएलसी) की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनडीए ने जहां 9 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं महागठबंधन की ओर से एक उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल किया है।
इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और मंत्री दीपक प्रकाश को टिकट न मिलने को लेकर हो रही है। टिकट वितरण के बाद राजनीतिक गलियारों में इस फैसले पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए शायराना अंदाज में प्रतिक्रिया दी। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि गालिब के शेर “हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले” के जरिए उन्होंने गठबंधन की राजनीति में संतुलन की जरूरत को समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन में सभी दलों को समान अवसर नहीं मिल पाता और ऐसे में राजनीतिक परिपक्वता जरूरी होती है।
उपेंद्र कुशवाहा की कथित नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल पर अरुण भारती ने कहा कि गठबंधन के भीतर अपनी बात रखने के लिए उचित मंच मौजूद है और सभी नेताओं को वहीं अपनी बात रखनी चाहिए।
इसी दौरान दीपक प्रकाश के सोशल मीडिया प्रोफाइल से “मंत्री” शब्द हटाए जाने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे लेकर विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं।
गौरतलब है कि दीपक प्रकाश बिना किसी विधायी सदन के सदस्य रहते हुए मंत्री पद की शपथ लेने वाले नेताओं में शामिल हैं। उनके मंत्री पद को लेकर पहले भी कानूनी और राजनीतिक स्तर पर सवाल उठ चुके हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की चर्चाओं में रहा है।
एमएलसी चुनाव में टिकट न मिलने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य और मंत्री पद को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
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