Last updated: December 13th, 2025 at 01:44 pm

बिहार सरकार ने राज्य के युवाओं को रोजगार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 5 करोड़ रोजगार सृजन योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए एक नया विभाग स्थापित किया है। इस विभाग का मुख्य उद्देश्य रोजगार योजनाओं को एक ही मंच से संचालित करना और युवाओं तक उनका सीधा लाभ पहुंचाना है। लंबे समय से बिहार में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या रही है, ऐसे में यह फैसला युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण माना जा रहा है।
अब तक रोजगार और स्किल से जुड़ी योजनाएं अलग-अलग विभागों के तहत चल रही थीं, जिससे तालमेल की कमी और योजनाओं के सही क्रियान्वयन में दिक्कत आती थी। कई बार युवाओं को जानकारी के अभाव में योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने एक अलग और समर्पित विभाग बनाने का फैसला किया है, ताकि रोजगार से जुड़ी सभी योजनाएं एक ही दिशा में काम कर सकें।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में लगभग 5 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार और रोजगार से जुड़े अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसमें सरकारी नौकरी के साथ-साथ निजी क्षेत्र, स्वरोजगार, स्टार्टअप और कौशल आधारित रोजगार को भी शामिल किया गया है। सरकार मानती है कि सिर्फ सरकारी नौकरी से बेरोजगारी की समस्या हल नहीं हो सकती, इसलिए निजी क्षेत्र और स्वरोजगार पर भी जोर दिया जा रहा है।
नए विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं को बेहतर स्किल ट्रेनिंग देना होगी। इसके तहत तकनीकी प्रशिक्षण, आईटी स्किल, डिजिटल स्किल, उद्योग से जुड़ी ट्रेनिंग और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि युवा सिर्फ नौकरी मांगने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले भी बन सकें।
इस नए विभाग के जरिए युवाओं को रोजगार से जुड़ी जानकारी एक ही जगह पर मिलेगी। ट्रेनिंग, प्लेसमेंट, लोन सुविधा और स्वरोजगार योजनाओं को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे युवाओं को बार-बार अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पारदर्शी सिस्टम से चयन और ट्रेनिंग की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विभाग सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर काम करता है, तो यह बिहार के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। वहीं विपक्ष का कहना है कि पहले भी कई योजनाएं आईं, लेकिन सही निगरानी के अभाव में वे सफल नहीं हो पाईं। सरकार को इस बार परिणाम दिखाने होंगे।
नए विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती योजनाओं का सही क्रियान्वयन और निजी क्षेत्र के साथ बेहतर तालमेल बनाना होगा। इसके लिए पारदर्शिता, समयबद्ध लक्ष्य और मजबूत निगरानी तंत्र जरूरी है। अगर इन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया, तो योजना सफल हो सकती है।नौकरी योजना के लिए नए विभाग का गठन बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। अगर इसे ईमानदारी और सही रणनीति के साथ लागू किया गया, तो यह लाखों युवाओं के भविष्य को बदल सकता है और बिहार में रोजगार की तस्वीर को बेहतर बना सकता है।
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