Last updated: April 5th, 2026 at 08:31 am

बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है और सत्ता परिवर्तन की चर्चा जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व बदलाव की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि शपथ ग्रहण के बाद एनडीए के शीर्ष नेता और नीतीश कुमार मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा फैसला हो सकता है।
जल्द मिल सकता है नया चेहरा
राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अब निर्णय का समय करीब माना जा रहा है। माना जा रहा है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते तक राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है, जिससे प्रशासनिक कामकाज में नई दिशा देखने को मिलेगी।
नीतीश कुमार वर्ष 2005 से बिहार की सत्ता संभालते आ रहे हैं। बीच-बीच में थोड़े समय के अंतराल को छोड़ दें तो वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहे हैं। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम माना जा रहा है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक हलकों से अब भी उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की जा रही है, लेकिन राज्यसभा के लिए उनके निर्वाचित होने के बाद अब नजरें उनके शपथ ग्रहण पर टिक गई हैं।
राज्यसभा में कई बड़े चेहरे
नीतीश कुमार के साथ ही कई अन्य प्रमुख नेता भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार शामिल हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि राज्य में अगला मुख्यमंत्री भाजपा से हो सकता है। वहीं, जदयू के कुछ नेता नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को जिम्मेदारी देने की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थन में कई जगह पोस्टर भी देखे जा रहे हैं।
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