Last updated: January 9th, 2026 at 05:15 pm

बिहार में ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल की गई है। राज्य के लगभग 14,000 घरों में अब रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। यह कदम न केवल हर घर में बिजली की बचत करेगा, बल्कि राज्य में ग्रीन एनर्जी यानी स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के प्रयोग को भी बढ़ावा देगा।
रूफटॉप सोलर पैनल का मतलब है कि घर की छत पर छोटे सोलर पैनल लगाए जाएँ, जो सूर्य की रोशनी से बिजली उत्पन्न करते हैं। इससे घरों में जरूरत के अनुसार बिजली सीधे इस्तेमाल की जा सकती है। इस प्रक्रिया में बिजली के बिल में कमी आती है और बिजली की कमी या ब्लैकआउट की समस्या से भी राहत मिलती है।
बिहार सरकार और केंद्रीय मंत्रालय ने मिलकर इस योजना को बढ़ावा दिया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को इसके लिए जागरूक किया गया और उन्हें सोलर पैनल लगाने में आर्थिक मदद भी दी गई। लोगों को इसके फायदे समझाने के लिए कई अभियान और शिविर आयोजित किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे यह कदम न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है बल्कि बिजली की बचत और आर्थिक फायदा भी देता है।
इस योजना से राज्य में हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है। ग्रीन एनर्जी का मतलब है ऐसी ऊर्जा जो पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाती। सोलर पैनल से बिजली बनाने पर कोई प्रदूषण नहीं होता और यह नवीकरणीय ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। भारत जैसे देश में, जहाँ सूरज की रोशनी अधिकांश समय मौजूद रहती है, सोलर पैनल लगाने का यह तरीका बेहद उपयोगी है।
इस पहल से राज्य में बिजली की खपत को नियंत्रित करने में भी मदद मिली है। बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन को दूर करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ बिजली की कटौती और अस्थायी बिजली आपूर्ति की समस्या रहती है, वहां सोलर पैनल से लोगों को नियमित और सस्ती बिजली मिल रही है।
सरकार ने यह भी योजना बनाई है कि भविष्य में और अधिक घरों में यह सुविधा दी जाएगी। इससे लोगों की बिजली की जरूरत पूरी होगी और साथ ही पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा, इस पहल से राज्य में सोलर एनर्जी के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। सोलर पैनल लगाने, उसकी देखभाल करने और तकनीकी सहायता देने के लिए स्थानीय लोगों को नौकरी मिलने लगी है।
कुल मिलाकर, बिहार में 14,000 से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की यह योजना एक सफल और महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल बिजली बचाने और पर्यावरण को बचाने में मदद करती है, बल्कि लोगों को आर्थिक रूप से भी लाभ देती है। आने वाले समय में इस तरह की पहल और बढ़ाई जाएगी ताकि हर घर में स्वच्छ ऊर्जा पहुंच सके और राज्य में ऊर्जा के क्षेत्र में स्थायित्व आए।
इस योजना से यह संदेश भी जाता है कि अगर सरकार और लोग मिलकर काम करें तो न केवल बिजली की समस्या हल हो सकती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सुधार भी संभव है। बिहार की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकती है।
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