Last updated: November 5th, 2026 at 01:34 pm

बिहार विधान परिषद सचिवालय में हुई नियुक्तियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि 64 पदों पर बहाली की प्रक्रिया पूरी होने और सफल अभ्यर्थियों के नौकरी ज्वाइन करने के करीब डेढ़ महीने बाद सिर्फ सात नवनियुक्त निजी सहायकों को दोबारा परीक्षा देने का नोटिस जारी कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थियों ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने विधान परिषद सचिवालय से जवाब दाखिल करने को कहा है।
दरअसल, बिहार विधान परिषद सचिवालय ने 26 नवंबर 2025 को विज्ञापन संख्या 2/25 जारी कर कुल 64 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे थे। इसमें निजी सहायक के 7, आशुलिपिक के 12, डाटा एंट्री ऑपरेटर के 35 और निम्न वर्गीय लिपिक के 10 पद शामिल थे। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद सितंबर 2026 में तत्कालीन सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए। इसके बाद सभी चयनित अभ्यर्थियों ने सचिवालय में अपना योगदान भी दे दिया।
विवाद तब शुरू हुआ, जब 22 अक्टूबर 2026 को विधान परिषद सचिवालय की ओर से एक नया नोटिस जारी किया गया। इसमें सात नवनियुक्त निजी सहायकों को 4 नवंबर को दोबारा परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया। खास बात यह है कि इसी विज्ञापन के तहत चयनित आशुलिपिक, डाटा एंट्री ऑपरेटर और निम्न वर्गीय लिपिकों की नियुक्तियों पर ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ। केवल सात निजी सहायकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए कहे जाने से सचिवालय की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। नवनियुक्त निजी सहायक स्पृहा सिंह समेत सात अभ्यर्थियों ने CWJC संख्या 16927/2026 के तहत 22 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी है। याचिका में विधान परिषद सचिवालय के सचिव को पक्षकार बनाया गया है। 3 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने विधान परिषद सचिवालय को पूरे मामले पर काउंटर एफिडेविट यानी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक ही विज्ञापन के तहत 64 पदों पर नियुक्तियां हुईं, तो जांच या दोबारा परीक्षा की जरूरत सिर्फ सात निजी सहायकों के लिए ही क्यों पड़ी? अगर चयन प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका है, तो अन्य पदों पर हुई नियुक्तियों की जांच क्यों नहीं की जा रही? क्या बाकी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह सही पाई गई है? फिलहाल इन सवालों पर विधान परिषद सचिवालय की ओर से स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
गौरतलब है कि सात निजी सहायकों में स्पृहा सिंह, अमन कुमार, नमन राज, अंजली कुमारी आनंद, सुमित राज, गुड़िया कुमारी और शिमरण भारती शामिल हैं। इन सभी को 7 सितंबर 2026 को नियुक्ति से संबंधित आदेश जारी किया गया था और उन्होंने 12 सितंबर को सचिवालय में योगदान दिया था। अब मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सबकी निगाहें 22 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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