Last updated: June 12th, 2026 at 05:35 pm

पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की दो महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में 37 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (ASDO) और सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्ती परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंपी गई।
जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि परीक्षाओं में बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के कारण परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता प्रभावित हुई।
EOU की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मियों की नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं की गई थी। कई मामलों में पृष्ठभूमि सत्यापन और चयन प्रक्रिया में गंभीर खामियों की बात भी सामने आई है। इन तथ्यों के आधार पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
जांच एजेंसी को यह भी जानकारी मिली है कि कुछ अभ्यर्थियों तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से उत्तर पहुंचाने की कोशिश की गई थी। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और तकनीकी निगरानी से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष और कदाचार मुक्त बनाने के लिए आर्थिक अपराध इकाई ने विशेष निगरानी तंत्र तैयार किया है। इसके तहत संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और संगठित परीक्षा अपराधों पर रोक लगाने के लिए एक विशेष सेल का गठन किया गया है।
इसके अलावा भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण के लिए भी EOU ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक विभिन्न मामलों में जांच को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो अलग-अलग विभागों से जुड़ी शिकायतों और भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी करेगा।
जांच एजेंसियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले की तह तक जांच जारी रहेगी।
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