Last updated: March 29th, 2026 at 08:36 am

पटना। बिहार की राजनीति इस वक्त महज घटनाओं से नहीं, बल्कि सटीक टाइमिंग और अंदरूनी रणनीति से संचालित होती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि मामला अब सिर्फ औपचारिक इस्तीफों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा राजनीतिक गणित काम कर रहा है।
रविवार सुबह सबकी नजरें नितिन नवीन पर टिकी थीं। चर्चा थी कि वे विधायक पद से इस्तीफा देने वाले हैं, लेकिन ऐन वक्त पर पूरा सीन बदल गया। न इस्तीफा हुआ, न कोई आधिकारिक बयान, बल्कि वे अचानक असम के डिब्रूगढ़ के लिए रवाना हो गए। इस कदम ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है कि क्या ये महज संयोग है या किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा?
इधर मामला तब और गरम हो गया जब बिहार विधानसभा के स्पीकर प्रेम कुमार को भी अचानक दिल्ली बुला लिया गया। जो स्पीकर इस्तीफा लेने के लिए पटना पहुंचे थे, उनका अचानक दिल्ली जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। आधिकारिक वजह “इमरजेंसी” बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे एक सोचा-समझा मूव मान रहे हैं। हालांकि एक बात बिल्कुल साफ है, राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद नितिन नवीन का विधायक पद छोड़ना तय है। यह सिर्फ वक्त का खेल है कि इस्तीफा कब और किस संदेश के साथ सामने आता है।
अब सबसे बड़ा सवाल नीतीश कुमार को लेकर है। उन्हें भी 30 मार्च तक अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा देना है। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा तेज है,क्या दोनों नेताओं के इस्तीफे की टाइमिंग एक साथ सेट की जा रही है? क्या इसके जरिए कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है? सूत्रों के मुताबिक 10 अप्रैल को राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्य शपथ ले सकते हैं, जिसमें नीतीश कुमार, नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा जैसे बड़े नाम शामिल होंगे। इसके लिए 9 अप्रैल को दिल्ली पहुंचने की तैयारी चल रही है।
उधर, नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद पटना की बांकीपुर सीट खाली होना तय माना जा रहा है। ऐसे में उपचुनाव की आहट भी तेज हो गई है और सभी दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में जो दिख रहा है, असल कहानी उससे कहीं ज्यादा गहरी है। इस्तीफों की देरी, अचानक यात्राएं और नेताओं की गतिविधियां साफ संकेत दे रही हैं कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक खेल चल रहा है—जिसका असर आने वाले दिनों में खुलकर सामने आएगा।
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