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(Osaka - Japão, 28/06/2019) Presidente da República, Jair Bolsonaro, durante foto de família dos Líderes dos BRICS.
Foto: Alan Santos / PRनई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई है। इस बैठक में भारत ने वैश्विक व्यापार, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, डिजिटल विकास और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी मजबूत राय रखी। बैठक में शामिल देशों के प्रतिनिधियों ने भी वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
BRICS समूह में भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका समेत कई नए सदस्य देश शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में नई दिल्ली में हुई यह बैठक रणनीतिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के दौरान भारत ने आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। भारतीय प्रतिनिधियों ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है और इसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। भारत ने सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त वैश्विक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया।
इसके अलावा आर्थिक सहयोग और व्यापार को लेकर भी कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं। भारत ने सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने, सप्लाई चेन मजबूत करने और विकासशील देशों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS अब पश्चिमी आर्थिक संस्थाओं के विकल्प के रूप में भी देखा जाने लगा है।
बैठक में डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत ने डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपनी उपलब्धियों को सामने रखते हुए विकासशील देशों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की बात कही।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत लगातार वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। G20 के बाद अब BRICS जैसे मंचों पर भी भारत अपनी कूटनीतिक ताकत दिखा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत हो रहे हैं।
हालांकि BRICS के भीतर चीन और रूस जैसे देशों की मौजूदगी के कारण कई जटिल रणनीतिक मुद्दे भी जुड़े रहते हैं। भारत एक तरफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को भी प्राथमिकता दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BRICS की बढ़ती ताकत आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है। पश्चिमी देशों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भी इस संगठन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत इस मंच का इस्तेमाल विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के लिए कर रहा है।
बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। भारत ने कहा कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर आर्थिक और तकनीकी सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर निवेश बढ़ाने की आवश्यकता भी जताई गई।
देश की राजनीति में भी इस बैठक को लेकर चर्चा तेज रही। बीजेपी ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हुई है। वहीं विपक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ घरेलू मुद्दों पर भी समान ध्यान देने की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर भी BRICS बैठक से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और बयान लगातार वायरल हो रहे हैं। कई लोग इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ संगठन के भीतर मौजूद मतभेदों पर भी चर्चा कर रहे हैं।
फिलहाल BRICS बैठक के बाद भारत की विदेश नीति और वैश्विक रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर चर्चा जारी है। आने वाले समय में इस संगठन की भूमिका और भारत की भागीदारी वैश्विक राजनीति में और ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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