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बजट 2026 से बदली उम्मीदों की तस्वीर, उद्योग और उद्यमिता को मिला नया भरोसा

भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज
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भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा और सामाजिक समावेशन का स्पष्ट संकेत है। बजट आने के बाद उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं यह बताती हैं कि सरकार ने विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखा है। खास बात यह है कि इस बजट में दलित उद्यमियों, एमएसएमई सेक्टर और उत्तर प्रदेश जैसे उभरते राज्यों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं।

Table of Contents

    दलित उद्यमियों के लिए अवसरों की नई जमीन

    दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बजट को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि पशुपालन, मत्स्य पालन, मेडिकल सेवाओं और हॉस्पिटल सेक्टर में किए गए प्रावधान जमीनी स्तर पर जुड़े दलित उद्यमियों को सीधा लाभ पहुंचा सकते हैं। पशुओं की देखरेख से लेकर फूड प्रोसेसिंग तक, बजट ने ऐसे क्षेत्रों को चुना है जहां अनुभव और स्थानीय ज्ञान पहले से मौजूद है। 500 नए जलाशयों और अमृत सरोवरों के नवीनीकरण से मत्स्य पालन से जुड़े उद्यमों को गति मिलेगी, वहीं महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी दलित उद्यमिता में नया उत्साह भरने का काम करेगी।

    उद्योगों के लिए विकासोन्मुखी रोडमैप

    पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार बजट 2026 संतुलित और दूरदर्शी है। बुनियादी ढांचे में रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय, विनिर्माण को मजबूती और लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान से औद्योगिक विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को और मजबूत करेगा। एमएसएमई के लिए बेहतर वित्तीय सहयोग से रोजगार सृजन और निर्यात दोनों को सहारा मिलेगा।

    उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई रफ्तार

    एसोचैम के अनुसार बजट 2026 उत्तर प्रदेश के बढ़ते आर्थिक महत्व को स्वीकार करता है। वाराणसी के लिए विशेष पहल और लखनऊ, कानपुर व आगरा तक विस्तारित इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगा। आईटी सेवाओं को मिला अतिरिक्त प्रोत्साहन और एमएसएमई के लिए नई सहायता योजनाएं नवाचार और उद्यमिता को मजबूती देंगी। इससे न सिर्फ उद्योग बल्कि सामाजिक विकास को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    एमएसएमई सेक्टर सरकार की प्राथमिकता में

    सीआईआई के एमएसएमई पैनल का मानना है कि सरकार का रुख छोटे उद्योगों के प्रति बेहद सकारात्मक है। देश में करोड़ों एमएसएमई लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं। ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड, पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स का पुनर्जीवन और क्रेडिट गारंटी जैसी योजनाएं छोटे उद्यमों को स्थिरता और विस्तार दोनों देंगी। यह समर्थन आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करता है।

    कुल मिलाकर बजट 2026 विकास, समावेशन और विश्वास का संदेश देता है। यह बजट सिर्फ आज की जरूरतों को नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की संभावनाओं को भी आकार देने की कोशिश करता दिखता है।

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