
जम्मू-कश्मीर। देश में मानवाधिकारों और कानून के रखवालों द्वारा ही कानून के उल्लंघन की एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एक कांस्टेबल को हिरासत में अमानवीय और बर्बर यातनाएं देने के मामले में CBI ने दो साल बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए DSP एजाज अहमद नाइक समेत आठ पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है।
इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणी करते हुए पीड़ित को ₹50 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है, जो दोषी अधिकारियों से वसूल किया जाएगा।
यह मामला फरवरी 2023 का है, जब कांस्टेबल खुर्शीद अहमद को एक नारकोटिक्स केस में पूछताछ के लिए कुपवाड़ा स्थित जॉइंट इंटेरोगेशन सेंटर (JIC) में बुलाया गया। उस समय वह बारामुला जिला पुलिस लाइन में तैनात था।
खुर्शीद का आरोप है कि उसे 20 फरवरी 2023 को बुलाकर बिना किसी कानूनी आधार के लगातार 6 दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और दरिंदगी की हदें पार करते हुए यातनाएं दी गईं।
CBI की शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांस्टेबल खुर्शीद को:
ये सब कुछ किसी आतंकवादी या दुश्मन एजेंट के साथ नहीं, देश के अपने सिपाही के साथ किया गया, जिसने पहले कारगिल युद्ध जैसी लड़ाई में देश की सेवा की थी।
CBI की FIR में यह उल्लेख है कि तत्कालीन एसएसपी, कुपवाड़ा को इस अवैध हिरासत और यातना की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने चुप्पी साधे रखी। हालांकि उन्हें अभी FIR में आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस लापरवाही को गंभीर बताया है और संकेत दिए हैं कि जांच में सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा:
“उच्च न्यायालय नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में असफल रहा। यह संविधान के तहत उसके कर्तव्य का उल्लंघन है।”
कोर्ट ने CBI को जांच सौंपते हुए यह भी कहा कि:
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