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ऑपरेशन सिंदूर की आवाज बनीं कर्नल सोफिया कुरैशी, गणतंत्र दिवस पर विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित

भारत की सैन्य ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि उन चेहरों से भी पहचानी जाती है जो देश के सच
IMG_8044Colonel Sofiya Qureshi, addressing the media on ‘Operation Sindoor’ at National Media Centre, in New Delhi on May 07, 2025.

भारत की सैन्य ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि उन चेहरों से भी पहचानी जाती है जो देश के सच को दुनिया तक मजबूती से पहुंचाते हैं। ऐसा ही एक नाम है भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी। पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस साहस, स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ उन्होंने भारत का पक्ष रखा, अब उसी योगदान के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विशिष्ट सेवा मेडल VSM से सम्मानित किया जाएगा।

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    ऑपरेशन सिंदूर और भारत की सधी हुई रणनीति

    पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की अफवाहें फैलने लगीं। ऐसे संवेदनशील समय में भारतीय सेना की ओर से कर्नल सोफिया कुरैशी और भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह को सामने लाया गया। इन दोनों अधिकारियों ने न सिर्फ ऑपरेशन के उद्देश्य को स्पष्ट किया, बल्कि यह भी बताया कि भारत की कार्रवाई सीमित, सटीक और आतंक के खिलाफ थी, न कि किसी देश के खिलाफ। उनकी बातों ने दुनिया के सामने पाकिस्तान के झूठे दावों की पोल खोल दी।

    पहली बार सुर्खियों में कब आईं कर्नल सोफिया

    कर्नल सोफिया कुरैशी पहली बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चा में तब आई थीं जब उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय दल का नेतृत्व किया था। यह अभ्यास एक्सरसाइज फोर्स 18 के नाम से जाना गया, जिसे भारत ने आयोजित किया था। उस समय यह भारत का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभ्यास था, जिसमें 18 देशों की सेनाओं ने भाग लिया। खास बात यह रही कि लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी इस अभ्यास में शामिल सभी दलों में एकमात्र महिला अधिकारी थीं जो नेतृत्व की भूमिका में थीं।

    साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सफर

    गुजरात के वडोदरा की रहने वाली सोफिया कुरैशी का जन्म 1981 में हुआ। उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और साल 1999 में भारतीय सेना को जॉइन किया। उनका करियर सिर्फ फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा। साल 2006 में उन्होंने अफ्रीकी देश कांगो में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन में सैन्य पर्यवेक्षक के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा पंजाब सीमा पर ऑपरेशन पराक्रम के दौरान उनकी भूमिका के लिए उन्हें जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ का प्रशंसा पत्र भी मिल चुका है। नॉर्थ ईस्ट में आई भीषण बाढ़ के समय उनके राहत कार्यों की भी जमकर सराहना हुई थी।

    राष्ट्रपति की मंजूरी और बड़ा सम्मान

    25 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद वीरता पुरस्कारों और विशिष्ट सेवा मेडल पाने वाले अधिकारियों की सूची जारी की। इस सूची में कुल 133 अधिकारियों को विशिष्ट सेवा मेडल देने की घोषणा की गई, जिनमें कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम भी शामिल है। यह सम्मान न सिर्फ उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो सेना में रहकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।

    कर्नल सोफिया कुरैशी आज सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं, बल्कि भारत की दृढ़ता, सच्चाई और आत्मविश्वास की प्रतीक बन चुकी हैं।

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