Last updated: August 6th, 2026 at 08:34 am

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (एमएलसी) का सदस्य मनोनीत कर दिया गया है। राज्यपाल की ओर से जारी अधिसूचना के बाद उनके मंत्री पद को लेकर चल रही संवैधानिक अनिश्चितता समाप्त हो गई है। इस फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी जताई है।
मंत्री पद पर उठ रहे थे सवाल
दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के बाद विपक्ष लगातार इस बात को लेकर सवाल उठा रहा था कि वह संविधान में निर्धारित छह महीने की अवधि के भीतर विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बने थे। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा और मामला न्यायिक स्तर तक भी पहुंच गया।
सरकार ने उठाया त्वरित कदम
संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए सरकार ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर राज्य मंत्रिपरिषद की अनुशंसा के आधार पर राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को एमएलसी के रूप में मनोनीत कर दिया।
मार्च 2027 तक रहेगा कार्यकाल
दीपक प्रकाश का कार्यकाल उस सीट के शेष कार्यकाल के अनुसार मार्च 2027 तक रहेगा। इसके साथ ही उनके मंत्री पद की संवैधानिक वैधता को लेकर उठ रहे सभी राजनीतिक और कानूनी सवाल फिलहाल समाप्त हो गए हैं।
राजनीतिक चर्चाओं पर विराम
राज्यपाल की मंजूरी के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर चल रही चर्चाओं को विराम मिल गया है। अब दीपक प्रकाश विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ मंत्री पद का दायित्व भी निभाते रहेंगे।
![]()
Comments are off for this post.