Last updated: December 18th, 2025 at 04:30 pm

आज संसद के लोकसभा सत्र में राजधानी दिल्ली के बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर विशेष चर्चा होने जा रही है। दिल्ली-एनसीआर में लगातार खराब होती हवा, लोगों की सेहत पर पड़ते बुरे असर और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर सांसदों के बीच गंभीर बहस होने की उम्मीद है। इस चर्चा में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री सरकार का पक्ष रखेंगे और अब तक किए गए प्रयासों की जानकारी देंगे।
पिछले कुछ महीनों से दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रही है। हवा में खतरनाक कणों की मात्रा तय सीमा से कई गुना ज्यादा दर्ज की गई है। इसके कारण बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है और आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है “No PUC, No Fuel” नियम। इस नियम के तहत जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सड़कों पर चलने वाले ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर रोक लगेगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार से यह सवाल पूछ सकता है कि क्या सिर्फ नियम बनाने से प्रदूषण की समस्या हल हो जाएगी। विपक्ष का तर्क है कि पराली जलाने, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण और बढ़ते ट्रैफिक जैसे मुद्दों पर भी ठोस और स्थायी समाधान की जरूरत है। साथ ही यह भी सवाल उठ सकता है कि आम लोगों पर नियमों का बोझ तो नहीं डाला जा रहा, जबकि बड़े प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सख्ती कम है।
पर्यावरण मंत्री की ओर से यह उम्मीद की जा रही है कि वे प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार की दीर्घकालिक योजना पर भी प्रकाश डालेंगे। इसमें सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाना, उद्योगों पर सख्त निगरानी और राज्यों के साथ बेहतर समन्वय जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, दिल्ली और आसपास के राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करने की बात भी रखी जा सकती है, क्योंकि प्रदूषण की समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है।
इस चर्चा का उद्देश्य सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि समाधान निकालना होना चाहिए। दिल्ली के करोड़ों लोग साफ हवा में सांस लेना चाहते हैं और इसके लिए सरकार, विपक्ष, राज्य सरकारें और आम जनता सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। लोकसभा में होने वाली यह चर्चा इसलिए भी अहम है, क्योंकि इससे आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी नीतियों की दिशा तय हो सकती है।
कुल मिलाकर, आज की यह बहस दिल्ली के भविष्य और लोगों की सेहत से सीधे जुड़ी हुई है। अगर ठोस फैसले और प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो उम्मीद है कि आने वाले समय में दिल्ली की हवा साफ हो सकेगी और लोगों को राहत मिलेगी।
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