Last updated: June 5th, 2026 at 03:56 pm

नई दिल्ली, 5 जून। मालवीय नगर में हाल ही में हुए दर्दनाक अग्निकांड, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी, के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी को लेकर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस हादसे ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना के बाद उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अवैध निर्माण मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की सैलरी, पेंशन और संपत्ति से वसूली की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को जेल की सजा भी हो सकती है। सरकार ने इस दिशा में DDMA एक्ट 2005 को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी एजेंसियों को एक साथ काम करने के लिए अधिकृत किया गया है। अब जिलाधिकारी (DM) को विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है ताकि कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सके।
इसके अलावा, दिल्ली में DMA (डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट) लागू करने का भी फैसला लिया गया है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों को अधिकतम 2 साल तक की सजा का प्रावधान होगा।
सरकार ने MCD को भी निर्देश दिए हैं कि तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माणों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों को सील किया जाए। विशेष जांच टीम को यह भी आदेश दिया गया है कि अवैध रूप से चल रहे होटल और गेस्ट हाउस की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जाए।
निर्देशों के अनुसार, ग्राउंड प्लस 5 से अधिक ऊंचाई वाली अवैध इमारतों को भी सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, रेवेन्यू रिकवरी एक्ट के तहत यदि किसी घटना में सरकारी संपत्ति या जीवन का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई संबंधित अधिकारियों से की जाएगी।
सरकार ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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