Last updated: June 21st, 2026 at 05:32 am

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायपालिका के खिलाफ फैलाई जा रही फर्जी और अपमानजनक सामग्री पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने मेटा, गूगल और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे न्यायपालिका से जुड़ी फर्जी और आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंत प्रभाव से हटाएं। इसके साथ ही केंद्र सरकार को भी इंटरनेट पर फैल रही गलत और भ्रामक जानकारी को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस करिया ने भारतीय बैडमिंटन संघ द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में उन सोशल मीडिया पोस्ट्स और रिपोर्ट्स को हटाने की मांग की गई थी, जिनमें दावा किया गया था कि न्यायपालिका के शीर्ष जजों और कानून मंत्रियों ने 7 जून 2026 को लंदन में आयोजित एक बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह सामग्री प्रथम दृष्टया झूठी और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका और अन्य संस्थानों की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स को किसी भी अपमानजनक या फर्जी सामग्री पर स्वतः कार्रवाई करनी चाहिए और केवल अदालत के आदेश का इंतजार नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा अदालत ने आम नागरिकों को भी चेतावनी दी है कि वे ऐसी किसी भी फर्जी सामग्री को न तो अपलोड करें, न ही साझा करें और न ही उसका प्रसार करें। यह आदेश डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत सूचनाओं और फेक न्यूज पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
![]()
Comments are off for this post.