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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अंतर‑राज्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, आरोपी गिरफ्तार!

 दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अन्तर-राज्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, आरोपी गिरफ्तार दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने
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 दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अन्तर-राज्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, आरोपी गिरफ्तार

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    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में एक बड़े अंतर‑राज्य साइबर फ्रॉड नेटवर्क को तोड़ दिया है। यह गिरोह लंबे समय से डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को ठगने का काम कर रहा था। आरोपियों ने फर्जी निवेश योजना, डिजिटल ऐप धोखाधड़ी और अन्य साइबर स्कैम के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये ठगे। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब डिजिटल लेनदेन बढ़ रहे हैं और ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है।

    पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि यह नेटवर्क सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। इसके कई सदस्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा और अन्य राज्यों में सक्रिय थे। गिरोह ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके निवेशकों को आकर्षित किया और फिर उन्हें बड़े लाभ का वादा कर पैसे ऐंठे। जिन लोगों ने इन फर्जी योजनाओं में पैसा लगाया, उनकी संख्या हज़ारों में थी और कुल रकम करोड़ों रुपये में थी।

    क्राइम ब्रांच ने आरोपियों की वित्तीय लेनदेन का पूरा हिसाब निकालकर उनके ठगी के रास्तों का पता लगाया। साथ ही, उन्होंने डिजिटल ऐप और फर्जी वेबसाइट के सर्वर को भी सीज किया। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने नकली प्रोफाइल और फर्जी डॉक्यूमेंट के जरिए लोगों का विश्वास जीतकर पैसे ठगे। कुछ मामलों में तो उन्होंने डिजिटल अरेस्ट नामक स्कैम का भी इस्तेमाल किया, जिसमें लोगों को पुलिस कार्रवाई के डर से ब्लैकमेल किया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य पहले से ही पुलिस की निगरानी में थे। उन्होंने अपने नेटवर्क को कई लेयर में बांटा था ताकि पकड़ पाना मुश्किल हो। लेकिन पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल सबूतों की मदद से पूरी संरचना का खुलासा कर दिया। क्राइम ब्रांच ने सभी प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ आईटी एक्ट, धारा 420 और अन्य अपराधों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों को भी सचेत रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल निवेश, ऐप या वेबसाइट में पैसे डालने से पहले पूरी तरह जांच करना आवश्यक है। खासकर ऐसे प्लेटफॉर्म जिनमें बड़े लाभ का वादा किया जाता है, उसमें सतर्क रहना चाहिए।

    क्राइम ब्रांच की इस कार्यवाही ने दिखा दिया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और डिजिटल सबूतों की सही जांच से उनका नेटवर्क आसानी से तोड़ा जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकतानुसार अंतर‑राज्य सहयोग से अपराधियों को पकड़ने की योजना बनाई जाएगी।

    इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है कि साइबर फ्रॉड सिर्फ डिजिटल लेनदेन में नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन और आर्थिक सुरक्षा पर भी गहरा असर डालता है। पुलिस ने कहा कि आम नागरिकों को जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि वे फर्जी निवेश और डिजिटल ठगी के जाल में न फँसें।

    इस प्रकार, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी और सफल पहल के रूप में देखी जा रही है, जिसने अंतर‑राज्य स्तर पर सक्रिय गिरोह को न केवल पकड़ लिया बल्कि उसके नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

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