Last updated: September 7th, 2025 at 07:06 am

कोचस (रोहतास) : मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम की तैयारी को लेकर शनिवार को रोहतास की जिलाधिकारी उदिता सिंह कोचस प्रखंड क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचीं। अचानक एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने जिलाधिकारी को रुकने और संवेदनशील पहल करने के लिए प्रेरित कर दिया।
हाईस्कूल प्लस टू विद्यालय के पास से गुजरते समय उनकी नजर सड़क किनारे बर्तन धोती एक छोटी बच्ची पर पड़ी। पढ़ाई की उम्र में बच्ची का इस तरह मेहनत करते देख जिलाधिकारी ने तुरंत कदम रोके और उसके पास पहुंच गईं। बड़े अपनत्व से बातचीत कर उन्होंने बच्ची से उसकी स्थिति के बारे में जानकारी ली। बच्ची के स्कूल न जाने की बात सामने आने पर डीएम उदिता सिंह ने आश्वासन दिया कि अब उसका नामांकन विद्यालय में कराया जाएगा और उसे पढ़ाई का पूरा अवसर मिलेगा।
जिला पदाधिकारी ने मौके पर ही जिला शिक्षा पदाधिकारी, रोहतास को निर्देश दिया कि सोमवार तक हर हाल में बच्ची का नामांकन सुनिश्चित किया जाए और इसकी रिपोर्ट उन्हें सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। गरीब और वंचित तबके के बच्चे भी किसी सूरत में शिक्षा से वंचित नहीं रहने चाहिए।
डीएम ने अधिकारियों को चेताया कि इस दिशा में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से मिलने वाली हर सुविधा—वर्दी, किताब, छात्रवृत्ति और साइकिल—बच्ची तक समय पर पहुंचाई जाएगी। ताकि बच्ची न केवल विद्यालय से जुड़ सके, बल्कि आगे बढ़कर अपना भविष्य भी संवार सके।
जिलाधिकारी की इस संवेदनशील पहल की स्थानीय लोगों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच भी डीएम ने जिस तरह मानवीय पहल की है, वह काबिले-तारीफ है। उनका यह कदम न सिर्फ उस बच्ची का जीवन बदलने वाला है, बल्कि समाज के अन्य गरीब तबकों को भी शिक्षा की ओर प्रेरित करेगा।
ग्रामीणों ने कहा कि अक्सर गरीब परिवारों के बच्चे कम उम्र में घर के कामकाज और मजदूरी में लग जाते हैं। यदि प्रशासन इस तरह आगे आए तो ऐसे बच्चों का भविष्य भी रोशन हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम से पूर्व जिलाधिकारी का यह प्रयास शिक्षा की महत्ता को और मजबूत संदेश देगा।
डीएम उदिता सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य ही यह है कि योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक पहुंचे। बच्ची का नामांकन सुनिश्चित कराना उसी दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रशासन दृढ़ संकल्प के साथ काम करे तो शिक्षा की रोशनी हर घर तक पहुंचाई जा सकती है।
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