Last updated: August 28th, 2025 at 04:34 am

रोहतास, 28 अगस्त:
कभी खंडहर माना जाने वाला रोहतासगढ़ किला परिसर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर आज आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बन गया है। लगातार चौथे वर्ष यहां भव्य रूप से गणेश चतुर्थी का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। मंदिर के पुनर्जीवन की यह कहानी सिर्फ एक धार्मिक उत्सव की नहीं, बल्कि परंपरा, पहचान और पुनर्जागरण की है।
बुधवार को सुबह से ही गांवों से श्रद्धालुओं का तांता लग गया था। महिलाएं, पुरुष, बच्चे – सभी पीठ पर पूजा की थालियां और मन में श्रद्धा लिए पहुंचे। गणेश भगवान के दर्शन के साथ भजन-कीर्तन, शिव चर्चा और सामूहिक प्रार्थनाएं दिन भर चलती रहीं। पूरा वातावरण भक्ति और सामूहिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर मुगलकालीन आक्रमणों के दौरान खंडित हो गया था और लगभग चार शताब्दियों तक उपेक्षित पड़ा रहा। वर्ष 2022 में शाहाबाद महोत्सव आयोजन समिति के संयोजक अखिलेश कुमार की पहल पर इसे दोबारा जागरूकता और सामुदायिक सहयोग से पुनर्जीवित किया गया। उसी वर्ष से गणेश चतुर्थी का आयोजन प्रारंभ हुआ।
संयोजक अखिलेश कुमार ने बताया,
“यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों की पुनर्स्थापना है। हर साल यहां जुटने वाले श्रद्धालु हमारी इस विरासत को पुनर्जीवित कर रहे हैं।”
इस वर्ष आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही। समीपवर्ती गांवों के निवासी आयोजन में परिवार सहित शामिल हुए। विशेषकर युवा और बच्चों की भागीदारी उल्लेखनीय रही, जो इस सांस्कृतिक विरासत से अब जुड़ने लगे हैं।
ग्राम निवासी रामनारायण यादव ने कहा,
“जिस मंदिर को कभी लोग खंडहर समझते थे, अब वह हमारी आस्था और गौरव का केंद्र है।”
श्रद्धालु सुनैना देवी ने कहा,
“हमारे बच्चे अब जान रहे हैं कि हमारे गांव की परंपरा कितनी पुरानी और गौरवशाली है।”
समारोह के अंतर्गत विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में पूर्व मुखिया कृष्ण यादव और आयोजन समिति के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी सेवाएं स्वयंसेवकों और ग्रामीणों के सहयोग से पूर्ण रूप से स्वेच्छा से संचालित हुईं।
धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रोहतासगढ़ किला पहले से ही एक दर्शनीय स्थल है। अब इसके भीतर पुनर्जीवित गणेश मंदिर धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा दे सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पर्यटन विभाग से अपील की है कि यदि बुनियादी सुविधाएं और प्रचार-प्रसार मिले, तो यह स्थल एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।
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