Last updated: January 29th, 2026 at 01:18 pm

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अब सिर्फ दूरी नहीं घटेगी, बल्कि वक्त, मेहनत और संभावनाओं का हिसाब भी बदलेगा। गंगा एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और यह परियोजना राज्य की कनेक्टिविटी के साथ साथ आर्थिक भविष्य की तस्वीर को भी नया आकार देने जा रही है। 594 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पश्चिम से पूर्व उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली विकास की मजबूत रीढ़ बनकर उभर रहा है।
निर्माण कार्य लगभग पूरा, संरचनाएं तैयार
गंगा एक्सप्रेसवे का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इस पूरे कॉरिडोर पर बनने वाले सभी 1498 स्ट्रक्चर, जिनमें पुल, पुलिया और फ्लाईओवर शामिल हैं, सफलतापूर्वक तैयार कर लिए गए हैं। यह अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि परियोजना अब उद्घाटन के बेहद करीब है। छह लेन का यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है, जिससे आने वाले दशकों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है।
FASTag ट्रायल से मिला भरोसा
हाल ही में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के अलग अलग टोल प्लाजा पर फास्टैग आधारित टोल सिस्टम का ट्रायल किया। नतीजे बेहद उत्साहजनक रहे। टोल बैरियर महज डेढ़ से दो सेकंड में खुल गए, जिससे यह साफ हो गया कि एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यात्रियों को लंबी कतारों में खड़े होकर समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। यह तेज और सुचारु टोल व्यवस्था हाईवे यात्रा को और आरामदायक बनाएगी।
मेरठ से प्रयागराज अब होगा आसान सफर
आज मेरठ से प्रयागराज की यात्रा में करीब बारह घंटे लग जाते हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही यही सफर छह से आठ घंटे में पूरा किया जा सकेगा। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाला यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे बारह जिलों को सीधे तौर पर जोड़ देगा। इससे न सिर्फ यात्रा आसान होगी बल्कि क्षेत्रीय संपर्क भी मजबूत होगा।
उद्घाटन से बढ़ेगी आर्थिक रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि फरवरी 2026 के दूसरे सप्ताह तक हर हाल में काम पूरा किया जाए। माना जा रहा है कि अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस एक्सप्रेसवे का औपचारिक उद्घाटन कर सकते हैं। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक गलियारों का विकास होगा, जिससे निवेश, रोजगार और व्यापार को नई गति मिलेगी। गांवों से शहरों तक आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और उत्तर प्रदेश को विकास के नए नक्शे पर मजबूती से खड़ा करेंगी।
यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में सिर्फ दूरी नहीं घटाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की तरक्की को तेज रफ्तार देने वाला एक मजबूत माध्यम बनेगा।
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