Last updated: September 10th, 2025 at 04:00 am

पोस्टर प्रेजेंटेशन व वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को मिला सम्मान, ‘स्वस्थ वृद्धावस्था’ पर रखे गए विचार, विशेषज्ञों ने बताया—औषधि रहित उपचार की बढ़ती उपयोगिता
रोहतास। विश्व फिजियोथैरेपी दिवस के अवसर पर गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय में सोमवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित नारायण इंस्टिट्यूट ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज के फिजियोथैरेपी विभाग द्वारा यह आयोजन ‘स्वस्थ वृद्धावस्था’ विषय पर केंद्रित था। इसमें न केवल छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया बल्कि विशेषज्ञों ने भी फिजियोथैरेपी की बढ़ती उपयोगिता और महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद पोस्टर प्रेजेंटेशन और वाद-विवाद प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही, एक सप्ताह तक चलने वाले फिजियोथैरेपी शिविर में उल्लेखनीय योगदान देने वाले छात्रों की भी सराहना की गई।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के सचिव गोविंद नारायण सिंह और प्रतिकुलपति डॉ. जगदीश सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में फिजियोथैरेपी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित हो चुकी है। उम्र बढ़ने के साथ लगभग हर व्यक्ति को इसकी जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा, “फिजियोथैरेपी बगैर दवा के कौशलपूर्ण तरीके से मरीज को राहत देती है। हड्डी टूटने से लेकर पुराने दर्द तक, इसकी विधियां कारगर साबित हो रही हैं।”
इस अवसर पर नारायण मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण डीन डॉ. अंशुमान ने कहा कि भारत ही नहीं, विदेशों में भी फिजियोथैरेपी सेवाओं की काफी मांग है। इस क्षेत्र के छात्र अपने कौशल और मेहनत से स्वतंत्र रूप से काम कर ख्याति अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस पेशे में सेवा भाव और समर्पण जितना अधिक होगा, सफलता उतनी ही सुनिश्चित है।
विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. कुमार आलोक प्रताप, नारायण केयर के प्रभारी डॉ. अवनीश रंजन सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी फिजियोथैरेपी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में बढ़ते तनाव और बदलती जीवनशैली के बीच यह चिकित्सा पद्धति बड़ी राहत देने वाली साबित हो रही है।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों ने छात्रों को बुजुर्गों के साथ उनके जीवन-शैली में सुधार करने और उन्हें सहज बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ वृद्धावस्था केवल दवाइयों से संभव नहीं है, बल्कि व्यायाम, संतुलित जीवनशैली और फिजियोथैरेपी जैसी विधियों के सहारे इसे सहज बनाया जा सकता है।
छात्र-छात्राओं ने भी पोस्टर और वाद-विवाद प्रतियोगिता में अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का परिचय दिया। उनके प्रस्तुतिकरण में स्पष्ट था कि नई पीढ़ी इस क्षेत्र को केवल करियर ही नहीं बल्कि सेवा का माध्यम मान रही है।
फिजियोथैरेपी विभागाध्यक्ष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय समय-समय पर ऐसे आयोजन करता रहेगा जिससे छात्रों का न केवल ज्ञानवर्धन होगा बल्कि उनमें सामाजिक संवेदनशीलता भी विकसित होगी।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अतिथियों की भागीदारी रही। पूरा माहौल अकादमिक उत्साह और स्वास्थ्य जागरूकता से सराबोर रहा।
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