
ग्रेटर नोएडा से आई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, अव्यवस्थित निर्माण और सुस्त रेस्क्यू सिस्टम पर बड़ा सवाल बन चुका है। जिस तरह एक युवा इंजीनियर ने मदद के लिए तड़पते हुए अपनी जान गंवाई, उसने सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है।
क्या हुआ था उस रात?
इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में काम करते थे। शुक्रवार देर रात वह ग्रेटर नोएडा पहुंचे। उस वक्त घना कोहरा था। दृश्यता बेहद कम थी। इसी दौरान उनकी कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे बने नाले की दीवार तोड़ते हुए एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में जा गिरी। बेसमेंट में गहरा पानी भरा था। कार पानी में डूब गई और गेट लॉक हो गए, जिससे युवराज बाहर नहीं निकल पाए।
45 मिनट की वो खौफनाक जंग
युवराज ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए अपने पिता को फोन किया और पूरी घटना बताई। पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। चश्मदीदों के मुताबिक, युवराज करीब 45 मिनट तक मदद की गुहार लगाते रहे। बावजूद इसके, उन्हें समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका।
युवराज के पिता का आरोप है कि रेस्क्यू टीम पानी में उतरने से हिचक रही थी। ठंडा पानी, अंदर सरिया होने का डर और पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की कमी ने रेस्क्यू को सुस्त बना दिया। सवाल यह है कि अगर संसाधन और तैयारी होती, तो क्या युवराज की जान बच सकती थी?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोली सच्चाई
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि युवराज की मौत फेफड़ों में पानी भरने की वजह से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके फेफड़ों में करीब 1 से 2 लीटर पानी भर गया था और दिल ने काम करना बंद कर दिया। इसका मतलब साफ है कि वह लंबे समय तक पानी में फंसे रहे और तड़पते रहे।
बिल्डरों पर कार्रवाई शुरू
मामले के तूल पकड़ते ही ग्रेटर नोएडा पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी। गड़बड़ी के आरोप में कई बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पहले विश टाउन के बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। अब लॉट्स ग्रीन के बिल्डर रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कुल मिलाकर, पांच बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
प्रशासन पर गिरी गाज
युवराज मेहता की मौत के बाद योगी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ एम. लोकेश को पद से हटा दिया। साथ ही, पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इस एसआईटी में एडीजी जोन मेरठ, मंडलायुक्त मेरठ और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर शामिल हैं। जांच की कमान एडीजी जोन मेरठ के हाथ में है।
सवाल अब भी बाकी
यह मामला सिर्फ गिरफ्तारी या तबादले तक सीमित नहीं होना चाहिए। सवाल यह है कि अवैध और अधूरे निर्माण की जिम्मेदारी कौन लेगा? रेस्क्यू सिस्टम इतना कमजोर क्यों था? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
युवराज मेहता की मौत एक चेतावनी है अगर सिस्टम नहीं जागा, तो अगला शिकार कोई और हो सकता है।
![]()
Comments are off for this post.